Monday, 30 January 2017

Hindi one word substitutions - अनेक शब्दों का एक शब्द ( शब्द समूह )


Hindi one word substitutions - अनेक शब्दों का एक शब्द ( शब्द समूह )



वाक्यांश या शब्द–समूह -- शब्द

• हाथी हाँकने का छोटा भाला— अंकुश
• जो कहा न जा सके— अकथनीय
• जिसे क्षमा न किया जा सके— अक्षम्य
• जिस स्थान पर कोई न जा सके— अगम्य
• जो कभी बूढ़ा न हो— अजर
• जिसका कोई शत्रु न हो— अजातशत्रु
• जो जीता न जा सके— अजेय
• जो दिखाई न पड़े— अदृश्य
• जिसके समान कोई न हो— अद्वितीय
• हृदय की बातेँ जानने वाला— अन्तर्यामी
• पृथ्वी, ग्रहोँ और तारोँ आदि का स्थान— अन्तरिक्ष
• दोपहर बाद का समय— अपराह्न
• जो सामान्य नियम के विरुद्ध हो— अपवाद
• जिस पर मुकदमा चल रहा हो/अपराध करने का आरोप हो/अभियोग लगाया गया हो— अभियुक्त
• जो पहले कभी नहीँ हुआ— अभूतपूर्व
• फेँक कर चलाया जाने वाला हथियार— अस्त्र
• जिसकी गिनती न हो सके— अगणित/अगणनीय
• जो पहले पढ़ा हुआ न हो— अपठित
• जिसके आने की तिथि निश्चित न हो— अतिथि
• कमर के नीचे पहने जाने वाला वस्त्र— अधोवस्त्र
• जिसके बारे मेँ कोई निश्चय न हो— अनिश्चित
• जिसका भाषा द्वारा वर्णन असंभव हो— अनिर्वचनीय
• अत्यधिक बढ़ा–चढ़ा कर कही गई बात— अतिशयोक्ति
• सबसे आगे रहने वाला— अग्रणी
• जो पहले जन्मा हो— अग्रज
• जो बाद मेँ जन्मा हो— अनुज
• जो इंद्रियोँ द्वारा न जाना जा सके— अगोचर
• जिसका पता न हो— अज्ञात
• आगे आने वाला— आगामी
• अण्डे से जन्म लेने वाला— अण्डज
• जो छूने योग्य न हो— अछूत
• जो छुआ न गया हो— अछूता
• जो अपने स्थान या स्थिति से अलग न किया जा सके— अच्युत
• जो अपनी बात से टले नहीँ— अटल
• जिस पुस्तक मेँ आठ अध्याय होँ— अष्टाध्यायी
• आवश्यकता से अधिक बरसात— अतिवृष्टि
• बरसात बिल्कुल न होना— अनावृष्टि
• बहुत कम बरसात होना— अल्पवृष्टि
• इंद्रियोँ की पहुँच से बाहर— अतीन्द्रिय/इंद्रयातीत
• सीमा का अनुचित उल्लंघन— अतिक्रमण
• जो बीत गया हो— अतीत
• जिसकी गहराई का पता न लग सके— अथाह
• आगे का विचार न कर सकने वाला— अदूरदर्शी
• जो आज तक से सम्बन्ध रखता है— अद्यतन
• आदेश जो निश्चित अवधि तक लागू हो— अध्यादेश
• जिस पर किसी ने अधिकार कर लिया हो— अधिकृत
• वह सूचना जो सरकार की ओर से जारी हो— अधिसूचना
• विधायिका द्वारा स्वीकृत नियम— अधिनियम
• अविवाहित महिला— अनूढ़ा
• वह स्त्री जिसके पति ने दूसरी शादी कर ली हो— अध्यूढ़ा
• दूसरे की विवाहित स्त्री— अन्योढ़ा
• गुरु के पास रहकर पढ़ने वाला— अन्तेवासी
• पहाड़ के ऊपर की समतल जमीन— अधित्यका
• जिसके हस्ताक्षर नीचे अंकित हैँ— अधोहस्ताक्षरकर्
त्ता
• एक भाषा के विचारोँ को दूसरी भाषा मेँ व्यक्त करना— अनुवाद
• किसी सम्प्रदाय का समर्थन करने वाला— अनुयायी
• किसी प्रस्ताव का समर्थन करने की क्रिया— अनुमोदन
• जिसके माता–पिता न होँ— अनाथ
• जिसका जन्म निम्न वर्ण मेँ हुआ हो— अंत्यज
• परम्परा से चली आई कथा— अनुश्रुति
• जिसका कोई दूसरा उपाय न हो— अनन्योपाय
• वह भाई जो अन्य माता से उत्पन्न हुआ हो— अन्योदर
• पलक को बिना झपकाए— अनिमेष/निर्निमेष
• जो बुलाया न गया हो— अनाहूत
• जो ढका हुआ न हो— अनावृत
• जो दोहराया न गया हो— अनावर्त
• पहले लिखे गए पत्र का स्मरण— अनुस्मारक
• पीछे–पीछे चलने वाला/अनुसरण करने वाला— अनुगामी
• महल का वह भाग जहाँ रानियाँ निवास करती हैँ— अंतःपुर/रनिवास
• जिसे किसी बात का पता न हो— अनभिज्ञ/अज्ञ
• जिसका आदर न किया गया हो— अनादृत
• जिसका मन कहीँ अन्यत्र लगा हो— अन्यमनस्क
• जो धन को व्यर्थ ही खर्च करता हो— अपव्ययी
• आवश्यकता से अधिक धन का संचय न करना— अपरिग्रह
• जो किसी पर अभियोग लगाए— अभियोगी
• जो भोजन रोगी के लिए निषिद्ध है— अपथ्य
• जिस वस्त्र को पहना न गया हो— अप्रहत
• न जोता गया खेत— अप्रहत
• जो बिन माँगे मिल जाए— अयाचित
• जो कम बोलता हो— अल्पभाषी/मितभाषी
• आदेश की अवहेलना— अवज्ञा
• जो बिना वेतन के कार्य करता हो— अवैतनिक
• जो व्यक्ति विदेश मेँ रहता हो— अप्रवासी
• जो सहनशील न हो— असहिष्णु
• जिसका कभी अन्त न हो— अनन्त
• जिसका दमन न किया जा सके— अदम्य
• जिसका स्पर्श करना वर्जित हो— अस्पृश्य
• जिसका विश्वास न किया जा सके— अविश्वस्त
• जो कभी नष्ट न होने वाला हो— अनश्वर
• जो रचना अन्य भाषा की अनुवाद हो— अनूदित
• जिसके पास कुछ न हो अर्थात् दरिद्र— अकिँचन
• जो कभी मरता न हो— अमर
• जो सुना हुआ न हो— अश्रव्य
• जिसको भेदा न जा सके— अभेद्य
• जो साधा न जा सके— असाध्य
• जो चीज इस संसार मेँ न हो— अलौकिक
• जो बाह्य संसार के ज्ञान से अनभिज्ञ हो— अलोकज्ञ
• जिसे लाँघा न जा सके— अलंघनीय
• जिसकी तुलना न हो सके— अतुलनीय
• जिसके आदि (प्रारम्भ) का पता न हो— अनादि
• जिसकी सबसे पहले गणना की जाये— अग्रगण
• सभी जातियोँ से सम्बन्ध रखने वाला— अन्तर्जातीय
• जिसकी कोई उपमा न हो— अनुपम
• जिसका वर्णन न हो सके— अवर्णनीय
• जिसका खंडन न किया जा सके— अखंडनीय
• जिसे जाना न जा सके— अज्ञेय
• जो बहुत गहरा हो— अगाध
• जिसका चिँतन न किया जा सके— अचिँत्य
• जिसको काटा न जा सके— अकाट्य
• जिसको त्यागा न जा सके— अत्याज्य
• वास्तविक मूल्य से अधिक लिया जाने वाला मूल्य— अधिमूल्य
• अन्य से संबंध न रखने वाला/किसी एक मेँ ही आस्था रखने वाला— अनन्य
• जो बिना अन्तर के घटित हो— अनन्तर
• जिसका कोई घर (निकेत) न हो— अनिकेत
• कनिष्ठा (सबसे छोटी) और मध्यमा के बीच की उँगली— अनामिका
• मूलकथा मेँ आने वाला प्रसंग, लघु कथा— अंतःकथा
• जिसका निवारण न किया जा सके/जिसे करना आवश्यक हो— अनिवार्य
• जिसका विरोध न हुआ हो या न हो सके— अनिरुद्ध/
अविरोधी
• जिसका किसी मेँ लगाव या प्रेम हो— अनुरक्त
• जो अनुग्रह (कृपा) से युक्त हो— अनुगृहीत
• जिस पर आक्रमण न किया गया हो— अनाक्रांत
• जिसका उत्तर न दिया गया हो— अनुत्तरित
• अनुकरण करने योग्य— अनुकरणीय
• जो कभी न आया हो (भविष्य)— अनागत
• जो श्रेष्ठ गुणोँ से युक्त न हो— अनार्य
• जिसकी अपेक्षा हो— अपेक्षित
• जो मापा न जा सके— अपरिमेय
• नीचे की ओर लाना या खीँचना— अपकर्ष
• जो सामने न हो— अप्रत्यक्ष/परोक्ष
• जिसकी आशा न की गई हो— अप्रत्याशित
• जो प्रमाण से सिद्ध न हो सके— अप्रमेय
• किसी काम के बार–बार करने के अनुभव वाला— अभ्यस्त
• किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा— अभीप्सा
• जो साहित्य कला आदि मेँ रस न ले— अरसिक
• जिसको प्राप्त न किया जा सके
• जो कम जानता हो— अल्पज्ञ
• जो वध करने योग्य न हो— अवध्य
• जो विधि या कानून के विरुद्ध हो— अवैध
• जो भला–बुरा न समझता हो अथवा सोच–समझकर काम न करता हो— अविवेकी
• जिसका विभाजन न किया जा सके— अविभाज्य/अभाज्य
• जिसका विभाजन न किया गया हो— अविभक्त
• जिस पर विचार न किया गया हो— अविचारित
• जो कार्य अवश्य होने वाला हो— अवश्यंभावी
• जिसको व्यवहार मेँ न लाया गया हो— अव्यवहृत
• जो स्त्री सूर्य भी नहीँ देख पाती— असूर्यपश्या
• न हो सकने वाला कार्य आदि— अशक्य
• जो शोक करने योग्य नहीँ हो— अशोक्य
• जो कहने, सुनने, देखने मेँ लज्जापूर्ण, घिनौना हो— अश्लील
• जिस रोग का इलाज न किया जा सके— असाध्य रोग/लाइलाज
• जिससे पार न पाई जा सके— अपार
• बूढ़ा–सा दिखने वाला व्यक्ति— अधेड़
• जिसका कोई मूल्य न हो— अमूल्य
• जो मृत्यु के समीप हो— आसन्नमृत्यु
• किसी बात पर बार–बार जोर देना— आग्रह
• वह स्त्री जिसका पति परदेश से लौटा हो— आगतपतिका
• जिसकी भुजाएँ घुटनोँ तक लम्बी होँ— आजानुबाहु
• मृत्युपर्यन्त— आमरण
• जो अपने ऊपर निर्भर हो— आत्मनिर्भर/स्वावलंबी
• व्यर्थ का प्रदर्शन— आडम्बर
• पूरे जीवन तक— आजीवन
• अपनी हत्या स्वयं करना— आत्महत्या
• अपनी प्रशंसा स्वयं करने वाला— आत्मश्लाघी
• कोई ऐसी वस्तु बनाना जिसको पहले कोई न जानता हो— आविष्कार
• ईश्वर मेँ विश्वास रखने वाला— आस्तिक
• शीघ्र प्रसन्न होने वाला— आशुतोष
• विदेश से देश मेँ माल मँगाना— आयात
• सिर से पाँव तक— आपादमस्तक
• प्रारम्भ से लेकर अंत तक— आद्योपान्त
• अपनी हत्या स्वयं करने वाला— आत्मघाती
• जो अतिथि का सत्कार करता है— आतिथेय/मेजबान
• दूसरे के हित मेँ अपना जीवन त्याग देना— आत्मोत्सर्ग
• जो बहुत क्रूर व्यवहार करता हो— आततायी
• जिसका सम्बन्ध आत्मा से हो—आध्यात्मिक
• जिस पर हमला किया गया हो— आक्रांत
• जिसने हमला किया हो— आक्रांता
• जिसे सूँघा न जा सके— आघ्रेय
• जिसकी कोई आशा न की गई हो— आशातीत
• जो कभी निराश होना न जाने— आशावादी
• किसी नई चीज की खोज करने वाला— आविष्कारक
• जो गुण–दोष का विवेचन करता हो— आलोचक
• जो जन्म लेते ही गिर या मर गया हो— आजन्मपात
• वह कवि जो तत्काल कविता कर सके— आशुकवि
• पवित्र आचरण वाला— आचारपूत
• लेखक द्वारा स्वयं की लिखी गई जीवनी— आत्मकथा
• वह चीज जिसकी चाह हो— इच्छित
• किन्हीँ घटनाओँ का कालक्रम से किया गया वर्णन— इतिवृत्त
• इस लोक से संबंधित— इहलौकिक
• जो इन्द्र पर विजय प्राप्त कर चुका हो— इंद्रजीत
• माँ–बाप का अकेला लड़का— इकलौता
• जो इन्द्रियोँ से परे हो/जो इन्द्रियोँ के द्वारा ज्ञात न हो— इन्द्रियातीत
• दूसरे की उन्नति से जलना— ईर्ष्या
• उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा— ईशान/ईशान्य
• पर्वत की निचली समतल भूमि— उपत्यका
• दूसरे के खाने से बची वस्तु— उच्छिष्ट
• किसी भी नियम का पालन नहीँ करने वाला— उच्छृंखल
• वह पर्वत जहाँ से सूर्य और चन्द्रमा उदित होते माने जाते हैँ— उदयाचल
• जिसके ऊपर किसी का उपकार हो— उपकृत
• ऐसी जमीन जो अच्छी उत्पादक हो— उर्वरा
• जो छाती के बल चलता हो (साँप आदि)— उरग
• जिसने अपना ऋण पूरा चुका दिया हो— उऋण
• जिसका मन जगत से उचट गया हो— उदासीन
• जिसकी दोनोँ मेँ निष्ठा हो— उभयनिष्ठ
• ऊपर की ओर जाने वाला— उर्ध्वगामी
• नदी के निकलने का स्थान— उद्गम
• किसी वस्तु के निर्माण मेँ सहायक साधन— उपकरण
• जो उपासना के योग्य हो— उपास्य
• मरने के बाद सम्पत्ति का मालिक— उत्तराधिकारी/वारिस
• सूर्योदय की लालिमा— उषा
• जिसका ऊपर कथन किया गया हो— उपर्युक्त
• कुँए के पास का वह जल कुंड जिसमेँ पशु पानी पीते हैँ— उबारा
• छोटी–बड़ी वस्तुओँ को उठा ले जाने वाला— उठाईगिरा
• जिस भूमि मेँ कुछ भी पैदा न होता हो— ऊसर
• सूर्यास्त के समय दिखने वाली लालिमा— ऊषा
• विचारोँ का ऐसा प्रवाह जिससे कोई निष्कर्ष न निकले— ऊहापोह
• कई जगह से मिलाकर इकट्ठा किया हुआ— एकीकृत
• सांसारिक वस्तुओँ को प्राप्त करने की इच्छा— एषणा
• वह स्थिति जो अंतिक निर्णायक हो, निश्चित— एकांतिक
• जो व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर हो— ऐच्छिक
• इंद्रियोँ को भ्रमित करने वाला— ऐँद्रजालिक
• लकड़ी या पत्थर का बना पात्र जिसमेँ अन्न कूटा जाता है— ओखली
• साँप–बिच्छू के जहर या भूत–प्रेत के भय को मंत्रोँ से झाड़ने वाला— ओझा
• जो उपनिषदोँ से संबंधित हो— औपनिषदिक
• जो मात्र शिष्टाचार, व्यावहारिकता के लिए हो— औपचारिक
• विवाहिता पत्नी से उत्पन्न संतान— औरस
• हड्डियोँ का ढाँचा— कंकाल
• दो व्यक्तियोँ के बीच परस्पर होने वाली बातचीत— कथोपकथन
• बर्तन बेचने वाला— कसेरा
• जिसे अपने मत या विश्वास का अधिक आग्रह हो— कट्टर
• जिसकी कल्पना न की जा सके— कल्पनातीत
• ऐसा अन्न जो खाने योग्य न हो— कदन्न
• हाथी का बच्चा— कलभ
• कर्म मेँ तत्पर रहने वाला— कर्मठ
• एक के बाद एक— क्रम
• कान मेँ कही जाने वाली बात— कानाबाती/
कानाफूसी
• सरकार का वह अंग जो कानून का पालन करता है— कार्यपालिका
• शृंगारिक वासनाओँ के प्रति आकर्षित— कामुक
• जो दुःख या भय से पीड़ित हो— कातर
• अपनी गलती स्वीकार करने वाला— कायल
• दूसरे की हत्या करने वाला— कातिल
• बाल्यावस्था और युवावस्था के बीच की अवस्था— किशोरावस्था
• जो बात पूर्वकाल से लोगोँ मेँ सुनकर प्रचलित हो— किँवदन्ती/जनश्रुति
• अपने काम के बारे मेँ कुछ निश्चय न करने वाला— किँकर्तव्यविमूढ़
• वृक्ष लता आदि से ढका स्थान— कुञ्ज
• जिस लड़के का विवाह न हुआ हो— कुमार
• ऐसी लड़की जिसका विवाह न हुआ हो— कुमारी
• बुरे कार्य करने वाला— कुकर्मी
• बुरे मार्ग पर चलने वाला— कुमार्गी
• जिसकी बुद्धि बहुत तेज हो— कुशाग्रबुद्धि
• जो अच्छे कुल मेँ उत्पन्न हुआ हो— कुलीन
• वह व्यक्ति जिसका ज्ञान अपने ही स्थान तक सीमित हो— कूपमंडूक
• किए गए उपकार को मानने वाला— कृतज्ञ
• किए गए उपकार को न मानने वाला— कृतघ्न
• जो धन को अत्यधिक कंजूसी से खर्च करता हो— कृपण
• जिसने संकल्प कर रखा है— कृतसंकल्प
• जो केन्द्र से हटकर दूर जाता हो— केन्द्रापसारी
• जो केन्द्र की ओर उन्मुख हो— केन्द्राभिसारी/
केन्द्राभिमुख
• सर्प के शरीर से निकली हुई खोली— केँचुली
• जो क्षमा किया जा सके— क्षम्य
• जिसका कुछ ही समय मेँ नाश हो जाए— क्षणभंगुर
• जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैँ— क्षितिज
• जो भूख मिटाने के लिए बेचैन हो— क्षुधातुर
• भूख से पीड़ित— क्षुधार्त
• वह स्त्री जिसका पति अन्य स्त्री के साथ रात को रहकर प्रातः लौटे— खंडिता
• आकाशीय पिँडोँ का विवेचन करने वाला— खगोलशास्त्री
• जो व्यक्ति अपने हाथ मेँ तलवार लिए रहता है— खड्गहस्त
• नायक का प्रतिद्वन्द्वी— खलनायक
• जहाँ से गंगा नदी का उद्गम होता है— गंगोत्री
• शरीर का व्यापार करने वाली स्त्री— गणिका
• जो आकाश को छू रहा हो— गगनस्पर्शी
• पहले से चली आ रही परम्परा का अनुपालन करने वाला— गतानुगतिक
• ग्रहण करने योग्य— ग्राह्य
• गीत गाने वाला/वाली— गायक/गायिका
• गीत रचने वाला— गीतकार
• हर पदार्थ को अपनी ओर आकृष्ट करने वाली शक्ति— गुरुत्वाकर्षण
• जो बात गूढ़ (रहस्यपूर्ण) हो— गूढ़ोक्ति
• जीवन का द्वितीय आश्रम— गृहस्थाश्रम
• गायोँ के खुरोँ से उड़ी धूल— गोधूलि
• जब गायेँ जंगल से लौटती हैँ और उनके चलने की धूल आसमान मेँ उड़ती है (दिन और रात्रि के बीच का समय)— गोधूलि बेला
• गायोँ के रहने का स्थान— गौशाला
• घास खोदकर जीवन–निर्वाह करने वाला— घसियारा
• शरीर की हानि करने वाला— घातक
• जो घृणा का पात्र हो— घृणित/घृणास्पद
• जिसके सिर पर चंद्रकला हो (शिव)— चंद्रचूड़/चंद्रशेखर
• वह कृति जिसमेँ गद्य और पद्य दोनोँ होँ— चंपू
• चक्र के रूप मेँ घूमती हुई चलने वाली हवा— चक्रवात
• ब्याज का वह प्रकार जिसमेँ मूल ब्याज पर भी ब्याज लगता है— चक्रवृद्धि ब्याज
• जिसके हाथ मेँ चक्र हो— चक्रपाणि
• चार भुजाओँ वाला— चतुर्भुज
• कार्य करने की इच्छा— चिक्कीर्षा
• लंबे समय तक जीने वाला— चिरंजीवी
• जो चिरकाल से चला आया है— चिरंतन
• जो बहुत समय तक ठहर सके— चिरस्थायी
• चिँता (चिँतन) करने योग्य बात— चिँतनीय/चिँत्य
• जिस पर चिह्न लगाया गया हो— चिह्नित
• चार पैरोँ वाला— चौपाया/चतुष्पद
• जो गुप्त रूप से निवास कर रहा हो— छद्मवासी
• दूसरोँ के केवल दोषोँ को खोजने वाला— छिद्रान्वेषी
• पत्थर को गढ़ने वाला औजार— छैनी
• एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलने वाला— जंगम
• पेट की अग्नि— जठराग्नि
• बारात ठहरने का स्थान— जनवासा
• जो जल बरसाता हो— जलद
• जो जल से उत्पन्न हो— जलज
• वह पहाड़ जिसके मुख से आग निकले— ज्वालामुखी
• जल मेँ रहने वाला जीव— जलचर
• जनता द्वारा चलाया जाने वाला तंत्र— जनतंत्र
• उम्र मेँ बड़ा— ज्येष्ठ
• जो चमत्कारी क्रियाओँ का प्रदर्शन करता हो— जादूगर
• जिसने आत्मा को जीत लिया हो— जितात्मा
• जानने की इच्छा रखने वाला— जिज्ञासु
• इन्द्रियोँ को वश मेँ करने वाला— जितेन्द्रिय
• किसी के जीवन–भर के कार्योँ का विवरण— जीवन–चरित्र
• जो जीतने के योग्य हो— जेय
• जेठ (पति का बड़ा भाई) का पुत्र— जेठोत
• स्त्रियोँ द्वारा अपनी इज्जत बचाने के लिए किया गया सामूहिक अग्नि-प्रवेश— जौहर
• ज्ञान देने वाली— ज्ञानदा
• जो ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखता हो— ज्ञानपिपासु
• बहुत गहरा तथा बहुत बड़ा प्राकृतिक जलाशय— झील
• जहाँ सिक्कोँ की ढलाई होती है— टकसाल
• बर्तन बनाने वाला— ठठेरा
• जनता को सूचना देने हेतु बजाया जाने वाला वाद्य— ढिँढोरा
• जो किसी भी गुट मेँ न हो— तटस्थ/निर्गुट
• हल्की नीँद— तन्द्रा
• जो किसी कार्य या चिन्तन मेँ डूबा हो— तल्लीन
• ऋषियोँ के तप करने की भूमि— तपोभूमि
• उसी समय का— तत्कालीन
• वह राजकीय धन जो किसानोँ की सहायता हेतु दिया जाता है— तक़ाबी
• जिसमेँ बाण रखे जाते हैँ— तरकश/तूणीर
• जो चोरी–छिपे माल लाता ले जाता हो— तस्कर
• किसी को पद छोड़ने के लिए लिखा गया पत्र— त्यागपत्र
• तर्क करने वाला व्यक्ति— तार्किक
• दैहिक, दैविक और भौतिक सुख— तापत्रय
• तैर कर पार जाने की इच्छा— तितीर्षा
• ज्ञान मेँ प्रवेश का मार्गदर्शक— तीर्थँकर
• वह व्यक्ति जो छुटकारा दिलाता है/रक्षा करता है— त्राता
• दुखान्त नाटक— त्रासदी
• भूत, वर्तमान और भविष्य को जानने/देखने वाला— त्रिकालज्ञ/त्रिकालदर्शी
• गंगा, जमुना और सरस्वती नदी का संगम— त्रिवेणी
• जिसके तीन आँखे हैँ— त्रिनेत्र
• वह स्थान जो दोनोँ भृकुटिओँ के बीच होता है— त्रिकुटी
• तीन महीने मेँ एक बार— त्रैमासिक
• जो धरती पर निवास करता हो— थलचर
• पति और पत्नी का जोड़ा— दंपती
• दस वर्षोँ की समयावधि— दशक
• गोद लिया हुआ पुत्र— दत्तक
• संकुचित विचार रखने वाला— दक़ियानूस
• धन जो विवाह के समय पुत्री के पिता से प्राप्त हो— दहेज
• जंगल मेँ फैलने वाली आग— दावानल
• दिन भर का कार्यक्रम— दिनचर्या
• दिखने मात्र को अच्छा लगने वाल— दिखावटी
• जो सपना दिन (दिवा) मेँ देखा जाता है— दिवास्वप्न
• दो बार जन्म लेने वाला (ब्राह्मण, पक्षी, दाँत)— द्विज
• जिसने दीक्षा ली हो— दीक्षित
• अनुचित बात के लिए आग्रह— दुराग्रह
• बुरे भाव से की गई संधि— दुरभिसंधि
• वह कार्य जिसको करना कठिन हो— दुष्कर
• दो विभिन्न भाषाएँ जानने वाले व्यक्तियोँ को एक–दूसरे की बात समझाने वाला— दुभाषिया
• जो शीघ्रता से चलता हो— द्रुतगामी
• जिसे कठिनाई से जाना जा सके— दुर्ज्ञेय
• जिसको पकड़ने मेँ कठिनाई हो— दुरभिग्रह/दुग्राह्य
• पति के स्नेह से वंचित स्त्री— दुर्भगा
• जिसे कठिनता से साधा/सिद्ध किया जा सके— दुस्साध्य
• जो कठिनाई से समझ मेँ आता है— दुर्बोध
• वह मार्ग जो चलने मेँ कठिनाई पैदा करता है— दुर्गम
• जिसमेँ खराब आदतेँ होँ— दुर्व्यसनी
• जिसको मापना कठिन हो— दुष्परिमेय
• जिसको जीतना बहुत कठिन हो— दुर्जेय
• वह बच्चा जो अभी माँ के दूध पर निर्भर है— दुधमुँहा
• बुरे भाग्य वाला— दुर्भाग्यशाली
• जिसमेँ दया भावना हो— दयालु
• जिसका आचरण बुरा हो— दुराचारी
• दूध पर आधारित रहने वाला— दुग्धाहारी
• जिसकी प्राप्ति कठिन हो— दुर्लभ
• जिसका दमन करना कठिन हो— दुर्दमनीय
• आगे की बात सोचने वाला व्यक्ति— दूरदर्शी
• देश से द्रोह करने वाला— देशद्रोही
• देह से सम्बन्धित— दैहिक
• देव के द्वारा किया हुआ— दैविक
• प्रतिदिन होने वाला— दैनिक
• धन से सम्पन्न— धनी
• जो धनुष को धारण करता हो— धनुर्धर
• धन की इच्छा रखने वाला— धनेच्छु
• गरीबोँ के लिए दान के रूप मेँ दिया जाने वाला अन्न–धन आदि— धर्मादा
• जिसकी धर्म मेँ निष्ठा हो— धर्मनिष्ठा
• किसी के पास रखी हुई दूसरे की वस्तु— धरोहर/थाती
• मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाला— धीवर
• जो धीरज रखता हो— धीर
• धुरी को धारण करने वाला अर्थात् आधारभूत कार्योँ मेँ प्रवीण— धुरंधर
• अपने स्थान पर अटल रहने वाला— ध्रुव
• ध्यान करने योग्य अथवा लक्ष्य— ध्येय
• ध्यान करने वाला— ध्याता/ध्यानी
• जिसका जन्म अभी–अभी हुआ हो— नवजात
• गाय को दुहते समय बछड़े का गला बाँधने की रस्सी जो गाय के पैरोँ मेँ बाँधी जाती है— नवि
• जो नया–नया आया है— नवागंतुक
• जिसका उदय हाल ही मेँ हुआ है— नवोदित
• जो आकाश मेँ विचरण करता है— नभचर
• सम्मान मेँ दी जाने वाली भेँट— नजराना
• जिस स्त्री का विवाह अभी हुआ हो— नवोढ़ा
• ईश्वर मेँ विश्वास न रखने वाला— नास्तिक
• पुराना घाव जो रिसता रहता हो— नासूर
• जो नष्ट होने वाला हो— नाशवान/नश्वर
• नरक के योग्य— नारकीय
• वह स्थान या दुकान जहाँ हजामत बनाई जाती है— नापितशाला
• किसी से भी न डरने वाला— निडर/निर्भीक
• जो कपट से रहित है— निष्कपट
• जो पढ़ना–लिखना न जानता हो— निरक्षर
• जिसका कोई अर्थ न हो— निरर्थक
• जिसे कोई इच्छा न हो— निस्पृह
• रात मेँ विचरण करने वाला— निशाचर
• जिसका आकार न हो— निराकार
• केवल शाक, फल एवं फूल खाने वाला या जो मांस न खाता हो— निरामिष
• जिससे किसी प्रकार की हानि न हो— निरापद
• जिसके अवयव न हो— निरवयव
• बिना भोजन (आहार) के— निराहार
• जो यह मानता है कि संसार मेँ कुछ भी अच्छा होने की आशा नहीँ है— निराशावादी
• जो उत्तर न दे सके— निरुत्तर
• जिसके कोई दाग/कलंक न हो— निष्कलंक
• जिसमेँ कोई कंटक/अड़चन न हो— निष्कंटक
• जिसका अपना कोई शुल्क न हो— निःशुल्क
• जिसके संतान न हो— निःसंतान
• जिसका अपना कोई स्वार्थ न हो— निस्स्वार्थ
• व्यापारिक वस्तुओँ को किसी दूसरे देश मेँ भेजने का कार्य— निर्यात
• जिसको देश से निकाल दिया गया हो— निर्वासित
• बिना किसी बाधा के— निर्बाध
• जो ममत्व से रहित हो— निर्मम
• जिसकी किसी से उपमा/तुलना न दी जा सके— निरुपम
• जो निर्णय करने वाला हो— निर्णायक
• जिसे किसी चीज की लालसा न हो— निष्काम
• जिसमेँ किसी बात का विवाद न हो— निर्विवाद
• जो निन्दा करने योग्य हो— निन्दनीय
• जिसमेँ किसी प्रकार का विकार उत्पन्न न हो— निर्विकार
• जो लज्जा से रहित हो— निर्लज्ज
• जिसको भय न हो— निर्भय
• जो नीति जानता हो— नीतिज्ञ
• रंगमंच पर पर्दे के पीछे का स्थान— नेपथ्य
• आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत करने वाला— नैष्ठिक
• जो नीति के अनुकूल हो— नैतिक
• जो न्यायशास्त्र की बात जानता हो— नैयायिक
• घृत, दुग्ध, दधि, शहद व शक्कर से बनने वाला पदार्थ— पंचामृत
• पक्षपात करने वाला— पक्षपाती
• पदार्थ का सबसे छोटा कण— परमाणु
जितने की आवश्यकता हो उतना— पर्याप्त
• महीने के दो पक्षोँ मेँ से एक— पखवाड़ा
• नाटक का पर्दा गिरना— पटाक्षेप/यवनिकापतन
• अपनी गलती के लिए किया हुआ दुःख— पश्चाताप
• केवल अपने पति मेँ अनुराग रखने वाली स्त्री— पतिव्रता
• पति को चुनने की इच्छा वाली कन्या— पतिम्वरा
• उपाय/मार्ग बताने वाला— पथ-प्रदर्शक/मार्गदर्शक
• अपने मार्ग से च्युत/भटका हुआ— पथभ्रष्ट
• अपने पद से हटाया हुआ— पदच्युत
• जो भोजन रोगी के लिए उचित है— पथ्य
• घूमने–फिरने/देश–देशान्तर भ्रमण करने वाला यात्री— पर्यटक
• केवल दूध पर निर्भर रहने वाला— पयोहारी
• दूसरोँ पर निर्भर रहने वाला— पराश्रित/पराश्रयी
• परपुरुष से प्रेम करने वाली स्त्री— परकीया
• पति द्वारा छोड़ दी गई पत्नी— परित्यका
• दूसरे का मुँह ताकने वाला— परमुखापेक्षी
• जो पहनने लायक हो— परिधेय
• जो मापा जा सके— परिमेय
• जो सदा बदलता रहे— परिवर्तनशील
• जो आँखोँ के सामने न हो— परोक्ष/अप्रत्यक्ष
• दूसरे पर उपकार करने वाला— परोपकारी/परमार्थी
• जो पूरी तरह से पक चुका हो/पारंगत हो चुका हो— परिपक्व
• पर्दे के अंदर रहने वाली— पर्दानशीन
• प्रशंसा करने योग्य— प्रशंसनीय
• किसी प्रश्न का तत्काल उत्तर दे सकने वाली मति— प्रत्युत्पन्नमति
• किसी वाद का विरोध करने वाला— प्रतिवादी
• शरणागत की रक्षा करने वाला— प्रणतपाल
• वह ध्वनि जो कहीँ से टकराकर आए— प्रतिध्वनि
• जो किसी मत को सर्वप्रथम चलाता है— प्रवर्तक
• वह स्त्री जिसके हाल ही मेँ शिशु उत्पन्न हुआ हो— प्रसूता
• वह आकृति जो किसी शीशे, जल आदि मेँ दिखाई दे— प्रतिबिम्ब
• हास्य रस से परिपूर्ण नाटिका— प्रहसन
• प्रमाण द्वारा सिद्ध करने योग्य— प्रमेय
• संध्या के बाद व रात्रि होने के पूर्व का समय— प्रदोष/पूर्वरात्र
• ज्ञान नेत्र से देखने वाला अंधा व्यक्ति— प्रज्ञाचक्षु
• सभा मेँ विचारार्थ प्रस्तुत बात— प्रस्ताव
• हाथ से लिखी गई पुस्तक— पाण्डुलिपि
• किसी परिश्रम के बदले मिलने वाली राशि— पारिश्रमिक
• जिसका स्वभाव पशुओँ के समान हो— पाशविक
• महीने के प्रत्येक पक्ष से संबंधित— पाक्षिक
• किसी विषय का पूर्ण ज्ञाता— पारंगत
• जिसमेँ से आर–पार देखा जा सकता हो— पारदर्शी
• जो परलोक से संबंधित हो— पारलौकिक
• मार्ग मेँ खाने के लिए भोजन— पाथेय
• जिसका संबंध पृथ्वी से हो— पार्थिव
• ज्ञात इतिहास के पूर्व समय का— प्रागैतिहासिक
• स्थल का वह भाग जिसके तीन ओर पानी हो— प्रायद्वीप
• जिसको देखकर अच्छा लगे— प्रियदर्शी
• पीने की इच्छा रखने वाला— पिपासु
• बार–बार कही गई बात— पुनरुक्ति
• जिसका पुनः जन्म हुआ हो— पुनर्जन्म
• पहले किया गया कथन— पूर्वोक्त
• दोपहर से पहले का समय— पूर्वाह्न
• प्राचीन इतिहास का ज्ञाता— पुरातत्त्ववेत्ता
• पीने योग्य पदार्थ— पेय
• पिता एवं प्रपिताओँ से संबंधित— पैतृक
• जो सम्पत्ति पिता से प्राप्त हो— पैतृक सम्पत्ति
• फटे–पुराने कपड़े पहनने वाला— फटीचर
• केवल फलोँ पर निर्वाह करने वाला— फलाहारी
• फल की इच्छा रखने वाला— फलेच्छु
• बुरी किस्मत वाला— बदकिस्मत
• बुरे मिजाज (आचरण) वाला— बदमिजाज
• सूर्योदय से पहले दो घड़ी तक का समय— ब्रह्ममुहूर्त
• जीवन का प्रथम आश्रम— ब्रह्मचर्याश्रम
• बहुत विषयोँ का जानकार— बहुज्ञ
• जिसने सुनकर अनेक विषयोँ का ज्ञान प्राप्त किया हो— बहुश्रुत
• समुद्र मेँ लगने वाली आग— बड़वानल
• जो अनेक रूप धारण करता हो— बहुरूपिया
• बहुत से देवताओँ के अस्तित्व मेँ विश्वास करने वाला मत— बहुदेववाद
• काफी अधिक कीमत का— बहुमूल्य
• अनेक भाषाओँ को जानने वाला— बहुभाषाविद्
• रात का भोजन— ब्यालू/रात्रिभोज
• जिस स्त्री के कोई संतान नहीँ हुई हो— बाँझ
• खाने का इच्छुक— बुबुक्षु

• किसी भवनादि के खंडित होने के बाद बचे भाग— भग्नावशेष
• भय के कारण बेचैन— भयाकुल
• भाग्य पर भरोसा रखने वाला— भाग्यवादी
• जो भाग्य का धनी हो— भाग्यवान
• दीवारोँ पर बने हुए चित्र— भित्तिचित्र
• जो पृथ्वी के भीतर का ज्ञान रखता हो— भूगर्भवेता
• धरती पर चलने वाला जन्तु— भूचर
• जो पहले था या हुआ— भूतपूर्व
• धरती को धारण करने वाला पर्वत— भूधर
• औषधियोँ का जानकार— भेषज
• प्रातःकाल गाया जाने वाला राग— भैरवी
• सूर्योदय के पहले का समय— भोर
• भूगोल से संबंधित— भौगोलिक
• फूलोँ का रस— मकरंद
• दोपहर का समय— मध्याह्न
• सर्दी मेँ होने वाली वर्षा— महावट/मावठ
• हाथी को हाँकने वाला— महावत
• सुख एवं दुःख मेँ एक समान रहने वाला— मनस्वी
• जिसकी आँखेँ मगर जैसी हो— मकराक्ष
• किसी मत का अनुसरण करने वाला— मतानुयायी
• दो पक्षोँ के बीच मेँ पड़कर फैसला कराने वाला— मखत्राता/यज्ञरक्

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Saturday, 28 January 2017

12 Haryanvi ( हरयाणवी ) lines You Use/Hear Every Day

1. When Someone missed the beat (losses the opportunity)




2. when someone asks you to do silly things /acts silly.



3. Her reaction when she notices you drooling over her.



4. When your friend found a girl hot.



5. Her reaction when someone tries to flatter her with his English accent.



6. Your reaction when you are quarreling with your friend and someone came as an arbitrator.



7. Your reaction when someone tries to interfere in your work.



8. Your friend’s reaction when you achieved something.



9. Bromance



10 . Your reaction when something happened unexpectedly.



11. When someone messed up with your things and you didn’t know who did this.




12. While expressing your love towards him/her.

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250 Important Haryanvi Idioms and Phrases - हरियाणा क़हावते और मुहावरे

The idioms and phrases in Haryan’s local languages have proved to be a rich source of knowledge about it’s social customs, traditions, farming methods and day-to-day living. These sayings become popular due to their sound basis and proved the test of time. Haryanavi language is no exception to it. Many proverbs have been adopted in Hindi language with a slight derivation. This section contains some popular sayings, the meanings of some of these have been given in brackets.

  1. अकल बिना ऊंट उभाणे फिरैं
  2. अकल मारी जाट की, राॅघङ राख़या हाली, वो उस नै काम कह, वो उस नै दे गाली
  3. अपनी रहिय्याँ नै न रोती, जेठ की जायियाँ नै रोवे
  4. अंधा न्यौतै और दो बुलावै अर तीसरा गैला आवे
  5. अरै, क्यूकर ब्याह में नाई की तरियां हो रहया सै ?
  6. अगेती फसल और अगेती मार करणियां की होवै ना कदे बी हार
  7. आई तीज, बिखेर गई बीज – आई होली, भर ले गई झोली
  8. आगै-पाछै नीम तळै (“one and the same thing”)
  9. आड़ की पड़छाड़ की, मेरे नाना की ससुराड़
  10. आया मंगसिर, जाड्डा चाल्या रंग-सिर – आया पौह, जाड्डे हा हुआ छोह – आया माह, जाड्डा चाल्या राह-ए-राह – आया फागण, जाड्डा चाल्या हागण !
  11. आब-आब कहते मरे सिरहाणै धरया रहया पाणी (आब मतलब पानी) means use language that all understand
  12. औंधै जाट नै लागी अंघाई, भैंस बेच कै धोडी बसाई
  13. आँकल-झोट्यां का खाया कदे बेकार ना जाया करै
  14. आन्धी पिस्से कुत्ते खा
  15. आंध्यां की माखी राम उडावै
  16. आंध्यां बांटै सीरणी अप अपणा नै दे – औरां की के फूट-गी, आगा बढ़-कै ले
  17. आंधा गुरू आंधा चेला – कूंऐं में दोनूं ढ़ेल्लम-ढ़ेल्लां
  18. आपना मारे छाया में गेरे
  19. इबै किमै ना बिगङया, इबै तै बेटी बाप कै सै (Situation tensed but under control)
  20. इतनै काणी का सिंगार होगा…. मेळा बिछड़ ज्यागा
  21. इतनी चीकणी हांडी होती तै कुत्ते ए ना चाट लेते !
  22. इसा भाज्या हांडै सै जणूं गहण में चूड़े हांड्या करैं
  23. इसे बावळे तै भैंसवाळ में पावैंगे जो नहा कै सान्नी काटैं
  24. इसे पिलूरे ना पाळियो जो जाड्डे में रजाई मांगैं
  25. ऊत न ऊत ग°गा जी के घाट पै टकरा ए जाया करै
  26. एक घर तै डायण भी छोड दिया करै
  27. एक भैंस सोवां कै गार लावै (एक सड़ी मछली सारे तालाब को गंदा करती है)
  28. ओछा बाणियां, गोद का छोहरा, ओछे की प्रीत, बाळू की भीत – कदे सुख नहीं दें (A cunning money lender, adopted son, cruel love and a sand-wall will never give happiness)
  29. काग पढ़ाया पींजरै, पढ-ग्या चारूं वेद, समझायां समझया नहीं रहया ढेढ का ढेढ (You cannot educate a crow like a parrot even if you teach him in a cage, he will not understand anything just like a foolish man will remain foolish and wont change.)
  30. काका कहे त कोए काकडी ना दे
  31. काका के हाथ में कुलहाङी पैनी लाग्या करै
  32. काका के हाथ में कस्सी हळवी (हल्की) लाग्या करै
  33. कदे कदे तै गधे की बी ग्यास आया करै
  34. कर जावै घूंघट आळी, नाम झुरमट आळी का (someone does the mischief, blame goes to someone else)
  35. करमा के लेख उघाङ-उघाङ देख
  36. करजा (debt) भला ना बाप का, बेटी भली ना एक
  37. कद (कब) मरी मेरी सासू — कद आये मेरै आँसू
  38. कमीना का बालक त्यौहार के दिन रूस्या करै
  39. काठ की हांडी रोज न चढ़ती
  40. काणी के ब्याह में सौ जोखिम
  41. काणे, टूंडे और लंगड़े में एक ऐब फालतू-ए पाया करै
  42. काणे की आंख में घाला घी अर नू कह मेरी फोड दी
  43. काने की अर तेरी बणे नही, काणे बिना तुझे सरे नही
  44. काम का ना काज का … ढाई मण अनाज का
  45. काम चुड़ैलां का, मिजाज परियां के ..
  46. काळे-काळे – सारे मेरे बाप के साळे
  47. काळे सिर आळे का कदे ना भरै (Human beings are never satisfied with their wealth)
  48. काया रहै निरोग जो कम खावै- उसका बिगड़ै ना काम जो गम खावै (He who eats less remains healthy. He never fails who does not get depressed)
  49. किमें मेरी का मन था, किमें आ-गे लणिहार
  50. कुत्ते कै घी हजम ना होया करै
  51. कुत्ते भोंके जा अर गाङी चाले जा
  52. कुम्हार की कुम्हारी पै तै पार बसावै ना, गधी के कान ऐंठण भाजै
  53. कुणबा खीर खा और देवते राजी हों (कनागत)
  54. के बाबा रेल में – के जेल में (Either this way, or that way)
  55. के जाणै भेङ बिंदौला की साह नै
  56. काटड़े की मां तलै 9 मण दूध, पर काटड़े का के ?
  57. काणे दादा पॉ लॉगू , वोहे लडाई के लच्छन
  58. खड़ा डरावा खेत में – ना खा, ना खाण दे
  59. खा तै खा घी तैं, ना तै जा जी तैं
  60. खाद पड़ै तै खेत, नांह तै कूड़ा रेत (Related to agriculture)
  61. खच्चरी मरी पड़ी सै, भाड़ा सोनीपत का ।
  62. खेती खसम हेती
  63. खांड का पानी होना अर्थ करे कराये पे पानी फिरना.
  64. गंजे रे गंजे टेरम टेर, लाठी ले के डांगर हेर
  65. गू खाओ तो हाथी का जो पेट भी भरे
  66. बकरी की मिंगन का क्ये खाया जो जाड भी न भरे
  67. गधे की आँख में घाल्या घी – वो बोल्या मेरी तै फोड़-ए दी !
  68. गधे की लात अर्र बीर की जात का कोए भरोसा नही होता
  69. गधी मरी पड़ी, सुणपत के भाड़े करै
  70. गरीब की बहु गाम की भाभी
  71. गोदी में छोरा और गांव में ढ़िंढ़ोरा
  72. गोबर में डळा मारै, अर खुद छींटम-छींट
  73. गाम बस्या ना, मंगते फिर गये
  74. गादड़ बिना झाड़ी में कौन हागै ?
  75. गादड़–गादड़ी का ब्याह, सूसा भात न्यौतण जा । चिड़िया गीत गाती जा, लौबाँ लाकड़ी चुग ल्या ।।(this one is children’s favourite)
  76. गादड़ की तावळ तैं बेर ना पाक्या करैं
  77. गादड़ी के कान ना तो छुड़ाये जां, ना पकड़े जां ! (The situation when you can neither walk on, nor walk out)
  78. बोळी गादड़ी के कान पकड़ना
  79. गादड्डी की मौत आवे जब गाम काने भाजा करे
  80. गावड़ी की लात खाली कोन्यां जाती
  81. गंडे तैं गंडीरी मीठी, गुड़ तैं मीठा राळा – भाई तैं भतीजा प्यारा, सब-तैं प्यारा साळा
  82. गंजी की मौत आवै जब वा कांकरां में कुल्लाबात्ती खाया करै
  83. गोह के जाए, सारे खुरदरे
  84. गुजर के सौ, जाट के नौ अर्र माली के दौ किल्ले बराबर होया करेँ
  85. गरीब की बहु सबकी भाभी
  86. घणी स्याणी दो बार पोवै – और भूखी सोवै
  87. घणी सराही ओड़ कुतिया मांड में डूब्या करै
  88. घर देख कै खावै, पड़ौसी देख कमावै (Spend according to your income and earn as your neighbor)
  89. घर तै जळ-ग्या पर मूस्यां कै आंख हो गई
  90. घर बेशक हीणा टोह दे, वर हीणा ना होना चाहिये
  91. घर में सूत ना पूणी, जुलाहे गैल लट्ठम-लट्ठां
  92. घी सुधारै खीचड़ी, और बड्डी बहू का नाम
  93. घी होगा तै अंधेरे मैए चमक जागा
  94. घोड़ी नै ठुकवाई तनहाळ, तो मींडकी नै भी टांग ठाई
  95. चालना राही का, चाहे फेर क्यूं ना हो । बैठना भाइयाँ का, चाहे बैर क्यूं ना हो ।।
  96. चोर नै फंसावै खांसी और छोरी नै फंसावै हांसी
  97. चोर के मन में डूम का ढांढा (चोर की दाढ़ी में तिनका)
  98. चोरटी बिल्ली, छीके की रुखाळी
  99. चाहे तै बावली सिर खुजावै ना, खुजावै तै लहू चला ले
  100. चुड़ा रग देख कै लठ मारया करै
  101. छाज तै बाजै-ए-बाजै, छालणी बी के बाजै – जिसमै 70 छेद ?
  102. जड़ै दीखै तवा-परांत, ऊड़ै गावैं सारी रात (To look for greener pasteurs)
  103. जाट मरया जिब जानिये जब तेरहवीं हो जाये
  104. जाट्टां का बूढा बुढापे मै बिगड्ड्या करे
  105. जाट गंडा ना दे, भेली दे (Penny wise, Pound foolish)
  106. जाट कहै जाटणी नै, जै गाम में सुखी रहना | कीड़ी खा-गी हाथी नै, हां-जी हां-जी कहना ।। (Jat says to his wife, “If you want to live happily in the village, then just say yes to every lie, even when someone says an ant has eaten an elephant)
  107. जाम दिये बाळक गूंद के लोभ में
  108. जेठ के भरोसे छोरी ना जामना
  109. जिस घर बड्डा ना मानिये, ढोरी पड़ै ना घास । सास-बहू की हो लड़ाई, उज्जड़ हो-ज्या बास ।। (A house where elders are not respected, cows are not fed well, where mother-in-law and daughter-in-law fight, that house can never flourish)
  110. जिस घर बड्डा ना बूझिये, दीवा जळै ना सांझ । सो घर उज्जड़ जानिये, जिस घर तिरिया बांझ ।| (In homes where elders’ opinions are not valued, where lamp is not lighted in the eveningस, where women are barren, know that such a house is almost finished)
  111. जिब कीड़ी अंडा दे चलै, चिड़िया न्हावै धूल – कहैं स्याणे सुणो भाई, बरसण में ना हो भूल (When ants carry eggs, sparrows play in sand – then it should be presumed that rains are very near)
  112. जै इतनी सूधी होती तै चाचा -ताऊ कै रहती (this is used and most suited to Muslims as they marry their daughters in close relations, hence this is used just to use utmost sarcasm for girls)
  113. जिसी नकटी देवी, उसे-ए ऊत पुजारी
  114. जिस गाम में ना जाना, उसके कोस क्यूं गिने
  115. जिसकै लागै, वोह-ए जाणै (only the wearer knows where the shoe pinches)
  116. जिसकी खाई बांकळी, उसके गाये गीत
  117. जिसका खावै टीकड़ा, उसका गावै गीतड़ा
  118. जिसनै करी सरम, उसके फूटे करम
  119. जिसनै चलणी बाट, उसनै किसी सुहावै खाट
  120. जूती तंग अर रिश्तेदार नंग – सारी जगहां सेधैं
  121. झोटे-झोटे लड़ैं, झाड़ियां का खो
  122. झूठा खाणा, मीठे के लोभ मै
  123. जोबन लुगाई का बीस या तीस, और बेल चले नों साल. मर्द और घोडा कदे ना हो बुढा, अगर मिले खुराक |
  124. टांग लम्बी धड छोटा वो ही आदमी खोटा
  125. ठाल्ली बैठे, नूण कै मांह हाथ
  126. ठाल्ली डूम ठिकाणा ढूंढ़ै….ठाल्ली नान काटङे मूनडे
  127. ठाढे की बहू सबकी दादी, माड़े की बहू सबकी भाभी (गरीब की जोरू सबकी भाभी)
  128. डंडा सी पूंछ, भदाणी का राह (एकदम सीधा रास्ता)
  129. ढ़ेढ नै ढेढ गंगा जी के घाट पै टोह ले
  130. ढूंढ में गधा लखावै – जिसकी छोटी आँख हो
  131. ठाढा मारै … रोवण दे ना, खाट खोस ले … सोवण दे ना (Might Is Right, or The Survival of the Fittest)
  132. तडके का मीह अर्र साँझ का बटेऊ टल्ल्या नही करते
  133. तन का उजला मन का काळा, बुगले जिसा भेस – इसां तैं तै भाई काग भला बाहर भीतर एक
  134. तीन पाव की 3 पोई, सवा सेर का एक । तन्नै पूत्ते 3 खाई, मन्नै चिन्दिया एक ।। (This one told by ladies)
  135. तीतर पांखी बादळी, दोफाहरे के पणिहार – खातिण चाल्ली इंधण नै, तीनूं नहीं भलार
  136. तेरे चीचड़ ना टूटैं म्हारे तैं (Means – “we are unable to serve you”)
  137. तेरे जामे होड़ तै इसै पाहया चालैंगे (means- Good for nothing)
  138. थोथा चना बाजे घना
  139. दानी काल परखियो, गाय नै फागण-माह – बहू नै जिब परखियो जिब धाँस पल्लै ना (He who helps in need is great. A cow which gives an offsping in winter month, is best because it would lactate even in summer months. A woman is judged when you have no money)
  140. दांतले खसम का ना रोये का बेरा पाटै, ना हांसते का !
  141. दूसरे की थाळी में लाडू बड्डे ए दीख्या करैं
  142. दूसरे की सौड़ में सोवै, वो फद्दू कहावै
  143. दो पैसे की हांडी गई, कुत्ते की जात पिछाणी गई
  144. दुबली नै दो षाढ़–Sunitahooda 00:29, 3 February 2009 (EST)
  145. दो िदन की मुसलमानी अळलाह-अळलाह पुकाऱै
  146. दही के भुळामै कपास खा ज्ञाणा – To take some action without judging the underlying risk and danger.
  147. दुध आली की तो लात भी उट जाया करे
  148. नहर तले का अर्र सहर तले का मानस खतरनाक हो सै
  149. नई-नई मुसलमाननी अल्लाह-अल्लाह पुकारै
  150. न्यूं बावळा सा हांडै सै जणूं बिगड़े ब्याह में नाई
  151. नानी फंड करै, धेवता डंड भरै (someone does the mischief and punishment goes to someone else)
  152. नाइयों की बारात में सारे ठाकर हुक्का कौन भरै ?
  153. नाई-के-रै-नाई-के मेरे बाल कोड़ोड़ – जजमान, तेरै आगै-ए ना आ-ज्यांगे
  154. नीम पै तै निम्बोळी ए लागैंगी
  155. पग पग पै बाजरा, मींडक कूदणी जवार – न्यूं बोवै जब कोए, घर का भरै भंडार (Related to agriculture)
  156. पत्थर का बाट – जितने बै तोलो, घाट-ए-घाट
  157. पकड़ण का ढ़ंग नहीं अर मारण की साई ले रहा !
  158. पानी में पादै, और बुलबुले ना ऊठैं !
  159. पाटडा चडतेहे रांड होगी
  160. पैंट की क्रीज खराब ना होण देता – और घर में मूस्से कुल्लाबात्ती करैं
  161. पुलिस के पीटे का आर चमस्सेय के रेह्पटे का के बुरा मानना
  162. पूत के पांव पालणे में ऐं दीख ज्याया करैं
  163. फूहड़ चालै सारा घऱ हालै
  164. पैसा नहीं पास मेला लगे उदास……..
  165. फूहड़ के तीन काम हगे, समेटे अर गेरन जा……….
  166. फूफा कहे त कोए फुकनी ना दे ‘ अर काका कहे ते कोई काकडी ना दे…..
  167. बकरी दूध तै दे.. पर मींगण कर-कै
  168. बकरा अपनी जान तैं गया, खाण आळे नै स्वाद भी ना आया
  169. बटेऊ खांड-मांडे खा, कुतिया की जीभ जळै
  170. बढिया मिल गया तो म्हारी के भाग ना तो मरियो नाई बाह्मन (पुराने टेम मे नाई और ब्राह्मन ही रिश्ते करवते थे)
  171. बहू तै सुथरी सै, पर काणी सै ..औ
  172. बहुआं हाथ चोर मरावै, चोर बहू का भाई
  173. बोहड़िया का भाई, गाम का साळा
  174. बहू आई रीमो-झीमो, बहू आई स्याणी भोत – आवतीं-हें न्यारी हो-गी, पाथणे ना आवैं चौथ !
  175. ब्याह में गाये गीत सारे साची ना होते
  176. बाप नै ना मारी मींडकी, बेटा तीरंदाज
  177. बेर खावै गादड़ी, ड़ंडे खावै रीझ
  178. बांदरां के बीच में गुड़ की भेल्ली
  179. बावळा चालै तो चाल्या-ए जा
  180. बावला या तो गाम जावे ना, जावे तो फेर आवे ना
  181. बावळी गादड़ी के पकड़े कान – ना छोडे जां, ना पकड़े राखे जां
  182. बारह बरस में तो कुरड़ी के भी भाग बाहवड़ आया करैं
  183. बिटोड़े में तै गोस्से ए लिकड़ैंगे
  184. बिन फेरयां का खसम ….
  185. बुलध ना ब्यावै तै के बूढ़ा-ए ना हो ?
  186. बूढ़ा मरो चाहे जवान, हत्या-सेती काम
  187. लखमीचंद ने कहा – बुलहद सींग का, मरद लंगोट का – बाऊ नाई का जवाब – बुलहद काँध का, मरद जुबान का !
  188. बेईमान की रुखाळ और आँख में बाळ – दोनूं करड़े काम सैं
  189. बोवो गेहूं काट कपास, ना हो डळा ना हो घास (Related to agriculture)
  190. बिली ढूध की रुखाली
  191. भांग मांगै भूगड़ा, सुल्फा मांगै घी – दारू मांगै खोंसड़ा (जूता), थारी खुशी पड़ै तै पी
  192. भीड़ मै डळा फद्दू कै-ए लाग्या करै
  193. “भुस में आग ला कै दमालो दूर खड़ी”
  194. भूखे की बाहवड़ जाया करै पर झूठे की ना बाहवड़्या करती
  195. भूआ जाऊं-जाऊं करै थी, फूफा लेण आ-ग्या !
  196. भोई-रै भोई, तन्नै रही-सही भी खोई
  197. भोळा बूझै भोळी नै – के रांधैगी होळी नै – मोठ बाजरा सब दिन रन्धैं सक्कर चावळ होळी नै (On the occasion of Holi festival)
  198. भैंस आपणे रंग नै ना देखै, छतरी नै देख कै बिधकै
  199. भादवे का घाम अर साझे का काम देहि तोडा करे (bhadva i.e desi calender month)
  200. भीत में आला अर, घर में साला ठीक ना होते
  201. मर-गी रांड खटाई बिना ! (To demand exceptional items)
  202. मंगळ करै दंगळ, बुध बिछोह हो, जुमे रात( वीरवार) की खीर खा कै, जुमे(शुकरवार) को जाणा हो
  203. मारते माणस का हाथ पकड़ ले…बोलते की जुबान ना पकड़ी जा
  204. मार कै भाग ज्या, अर खा कै सो ज्या – कोई ना पकड़ सकै
  205. मार पाछै किसी पुकार
  206. मरोड़ मैं तै करोड़ लागैंगे
  207. मति मारी जाट की, रांघड़ राख्या हाळी – वो उसनै काम कहै, वो दे उसनै गाळी The Jat has acted foolishly by keeping a ranghar (notorious member of society) as his farm worker, each time he tells him to work, the ranghar retorts by abuses.
  208. मींह में मूसळ का के भीजै सै
  209. मूसे नै पा-गी हल्दी की गांठ – पंसारी ए बण बैठ्या
  210. मूसे नै पा-गी खाकी कात्तर, वो-ए थाणेदार बण बैठ्या
  211. मूसे नै पा-ग्या सूआ, डाक्टर-ए बण बैठ्या
  212. मूंगफली ऊपर पानी पी ल्यो, खांसी हो ज्यागी – काणे गैल्यां ब्याह कर ल्यो, हांसी हो ज्यागी
  213. मां तै तरसै चौथी-चौथी नै, बेटी बिटौड़े के बिटौड़े बक्शै
  214. मां पै पूत पिता पै घोड़ा, घणा नहीं तै थोड़ा-थोड़ा
  215. मुल्ला की दौड़ मसिजद ताही
  216. मीठे के लोभ में जम के गेर दिए
  217. महकार कुन्धरे जितनी भी कोना नाम धरवालिया गुलाबो.महकार (Fragrance),कुन्धरे(kind of veg.)
  218. माँ री मामा आया, बोला भाई तो मेरा ए ना है
  219. या जुबान तो कह के भीतर बड जा फेर यु चाम बाहर पिटू जा
  220. यौवन लुगाई का बीस या तीस और बैल चलै नौ साल – मरद और घौड़ा कदे हो ना बूढ़ा, जै मिलता रहवै माल (खुराक) (Youth of a woman is 20 or 30, the ox remain active till 9 years, but man and horse, if given good diet, never get old)
  221. रांड तै रंडापा काट ले, रंडवे काटण दें जिब ना
  222. रांड तै वा हो सै जिसके मर-ज्यां भाई – खसम तै और-ऐ ना कर ले !
  223. रोता-सा जा, मरयां की खबर ल्यावै
  224. राम उसका भला करै, जो अपणा काम आप करै
  225. रै नाई-के, मेरे बाल कितने बड्डे सैं? – यजमान, ईब तेरै आगै-ए आ ज्यांगे !
  226. रूप रोवै, करम खावै
  227. लीपण का ना पोतण का, गू कुत्त्यां का !
  228. लीख (ढेरे) तैं ले कै किमैं सीख – इसकी टांट नै गंजी कर दे !
  229. शान्ति-हे शान्ति ! गधे चरांती – एक गधा लंगड़ा, वो-ए तेरा बंदड़ा !
  230. शेरां के हाथ-मुंह किसनै धोए .
  231. शेर का भाई बघेरा – वो कूदै नौ, और वो कूदै तेराह !
  232. शिकार के वक्‍त कुतिया हगाई फिरै (आग लगने पर कुंआ खोदना)
  233. शराबी के दो ठिकाने – ठेके पै जावै या थाने
  234. साझे का मारै काम और भादवे का मारै घाम
  235. साझे की होळी नै कोए बी जळा ज्या
  236. सूखा कसार खा-कै तै इसे-ए सपूत जामे जांगे
  237. सूधी छिपकली घणे माछर खावै
  238. सू-सू ना कहै, सुसरी कह दे (“Please be straightforward”)
  239. सौ दिन चोर के, एक दिन शाह का
  240. सयाना कौआ गू खाया करे
  241. साची कहना सुखी रहना, झूठ बोले खीचा खीचा फिरे
  242. हाळी का पेट सुहाळी खा-कै ना भरै
  243. हारे ओड़ कै दो लठ फालतू लाग्या करैं
  244. हांडी का छो बरोली पै
  245. हाँसी में हो-ज्या खाँसी
  246. हँसी-हँसी में हसनगढ़ बस-ग्य
  247. हाग्या जा ना पेट पीटे
  248. हाथी-घोड़े बह-गे अर गधी बूझै पाणी कितना ?
  249. हेजली के बाळक ना खिलाने चाहियें अर च्यातर का काम ना करना चाहिये
  250. हडकाई गादडी के कान पकडे गए
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