Tuesday, 7 February 2017

Indian Penal Code - भारतीय दंड संहिता



भारतीय दंड संहिता (I. P. C)

Indian Penal Code

नोट :- जिन धाराओं में दण्ड का प्रावधान है उसके आगे ⚠ का चिन्ह होगा।

🛂 प्रस्तावना 🛂

धारा - 1 =संहिता का नाम और विस्तार।

🛂 साधारण स्पष्टीकरण🛂

धारा - 21= लोक सेवक।

धारा - 34 = सामान आशय।

धारा - 52 = सद् भावपूर्ण।

धारा - 52. क = संश्रय।

🛂 साधारण अपवाद 🛂

धारा - 76 तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा आबद्ध )।

धारा - 79 = तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा न्यायनुमतः)।

धारा - 81 =यदि बड़ी हानि रोकने के लिए छोटी हानि करना अपराध नही।

धारा - 82 = 7 वर्ष से कम शिशु का अपराध नही।

धारा - 83 = 7-12 वर्ष के बीच अपराध नही (यदि अपरिपक्व हो)।

धारा - 84 = पागल द्वारा अपराध नही है।

धारा - 85 =मद्यपान में अपराध नही (इच्छा के विरुद्ध मद्यपान )।

धारा - 86 = मद्यपान में अपराध (इच्छा से, बिना ज्ञान के )।


🛂 प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार🛂

धारा - 96 = आत्मरक्षा में अपराध नही है।

धारा - 97 = अपना व दुसरे के शरीर, चोरी, लूट व रिष्टी में आत्मरक्षा का अधिकार।

धारा - 98 = पागल व बच्चों के हमले पर आत्मरक्षा का अधिकार।

धारा - 99 = आत्मरक्षा के अधिकार के बन्धन।

धारा - 100 = आत्मरक्षा में मृत्यु कारित करना ( 1. मृत्यु होने की आशंका हो। 2. गम्भीर चोट की आशंका हो 3. बलात्कार के हमले पर 4. प्रकृति के विरुद्ध काम - तृष्णा करने पर 5.व्यपहरन में 6. कहीं पर बंद हो और वहा से छूटने के लिए 7. अम्लीय हमले पर )।

धारा - 101 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट मारने का अधिकार।

धारा - 102 = आत्मरक्षा का अधिकार का प्रारंभ और बना रहना।

धारा - 103 = सम्पति की प्रतिरक्षा में मृत्युकारित करने का अधिकार (1.रात्री ग्रह भेदन 2. मानव के रहने वाले जगह पर रिष्टी(आग लगाना) 3. ग्रह-अतिचार में )।

धारा - 104 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट पहुंचाने का अधिकार (सम्पत्ति के लिए )।

धारा - 106 = आत्मरक्षा में निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुचाने का अधिकार।

🛂 आपराधिक षडयंत्र 🛂

धारा - 120.क = आपराधिक षड़यंत्र की परिभाषा (दो या दो से अधिक लोग रचे )।

धारा - 120.ख = आपराधिक षड्यंत्र का दण्ड। ⚠

🛂सरकार के विरुद्ध अपराध🛂

धारा - 121 = सरकार के विरुद्ध युध्द, प्रयत्न, दुष्प्रेरण करना। ⚠⚠⚠

धारा - 121.क = धारा - 121 का षड़यंत्र करना। ⚠⚠

धारा - 122 = सरकार के विरुद्ध करने के आशय से युद्ध के सामान इकठ्ठा करना। ⚠⚠

धारा - 123 = युध्द की होने वाली घटना को सफल बनाने के आशय से छिपाना।⚠

धारा - 124 = किसी विधिपूर्वक शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश या प्रयोग करने या अवरोध करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला। ⚠

धारा - 124.क = राजद्रोह। ⚠⚠

🛂लोक अशांति के अपराध🛂

धारा - 141 = विधि विरुद्ध जमाव (पाँच या ज्यादा )।

धारा - 142 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना।

धारा - 143 = दण्ड। ⚠

धारा - 144 = घातक हत्यार लेकर जमाव में सम्मिलित होना।⚠

धारा - 145 = विधि विरुद्ध जमाव को तितर-बितर होने का आदेश देने पर भी जानकर शामिल होना। ⚠

धारा - 146 = बल्वा करना। (विधि विरुद्ध जमाव का हिंसा करना )

धारा - 147 = बल्वा का दण्ड। ⚠

धारा - 148 = खतरनाक हत्यार लेकर बल्वा करना। ⚠

धारा - 149 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना (सामान उद्देश्य हो) तब सभी सदस्य दोषी होगे ।

धारा - 151 = पाँच या से अधिक लोगों को बिखर जाने का आदेश देने के बाद भी बना रहना। ⚠

धारा - 153 = बल्वा करने के इरादे से उत्तेजना देना। ⚠

धारा - 153 क = किसी धर्म, वर्ग, भाषा, स्थान, या समूह के आधार पर सौहार्द बिगाड़ने का कार्य करना। ⚠

धारा 153 कक = किसी जुलूस में जानबूझकर आयुध ले जाने या किसी सामुहिक प्रशिक्षण का आयुध सहित संचालन या भाग लेना। ⚠

धारा - 159 = दंगा (दो या अधिक लोग लडकर लोक शान्ति में विध्न डाले। )।

धारा - 153 ख = राष्ट्रीय एकता व अखण्डता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन। ⚠

धारा - 159 = दंगा (हंगामा ) जब कि दो या अधिक व्यक्ति लोक स्थान में लड़कर लोक शान्ति में विध्न डाले।

धारा - 160 = दगें का दण्ड। ⚠

🛂 लोक सेवको के अपराध🛂

धारा - 166 = लोक सेवक सरकारी काम न करें किसी को नुकसान पहुंचाने के आशय से। ⚠

धारा - 166.क = कोई लोक जानते हुए सरकारी कार्य की अपेक्षा करना। (कानून का पालन न करें ) ⚠

धारा - 166.ख = किसी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में पीड़ित का उपचार न करना (अपराधी केवल संस्थान का मुख्य होगा )। ⚠

धारा - 177 = जो कोई किसी लोक सेवक को ऐसे लोक सेवक को जो आबद्ध होते झुठी सुचना दे। ⚠

🛂लोक सेवक के प्राधिकार की अवमानना 🛂

धारा - 182 = कोई व्यक्ति लोक सेवक को झुठी सुचना दे दुसरे को क्षति पहुंचाने के लिए। ⚠

धारा - 186 = लोक सेवक के सरकारी कार्य में बाधा डालना। ⚠

धारा - 187 = यदि कोई लोक सेवक के द्वारा सहायता मांगने पर न दे और वह आबद्ध हो। ⚠

धारा - 188 = कोई व्यक्ति लोक सेवक की आदेश का पालन न करें जब वह काम विधिपूर्वक हो। ⚠

🛂झूठे साक्ष्य का अपराध 🛂

धारा - 201 = अपराध के साक्ष्य को छिपाना अपराधी को बचाने के आशय से।⚠

धारा - 212 = अपराधी को अपराध करने के बाद बचाने के लिए संश्रय देना, जानते हुए। (पति-पत्नी पर लागू नहीं )। ⚠

धारा - 216 = अपराधी को संश्रय देना। जब पकड़ने का आदेश या दोष सिद्ध हो।(पति-पत्नी पर लागू नहीं )। ⚠

धारा-216.क = लुटेरे या डाकुओं को संश्रय जानकर देना (पति-पत्नी पर लागू नहीं )। ⚠

धारा - 223 = लोक सेवक की लापरवाही से अभिरक्षा में से अपराधी का भाग जाना। ⚠

धारा - 224 = अपराधी स्वयं पकडे़ जाने का प्रतिरोध करना, बाधा डालना, निकल भागने का प्रयास करना।⚠

धारा - 225 = अपराधी का कोई अन्य लोगों द्वारा पकडे़ जाने का प्रतिरोध करना, बाधा डालना, निकल भागने का प्रयास करना।⚠

🛂 लोक स्वास्थ्य, सुविधा, सदाचार पर अपराध 🛂

धारा - 268 = लोक न्युन्सेस( कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करे जिससे लोक सेवक, जनसाधारण को या सम्पति को संकट, क्षोभ, क्षति, बाधा करें)।

धारा - 269 = ऐसा विधि विरुद्ध या लापरवाही से संक्रमण फैलाना।

धारा - 268 = लोक न्युन्सेस( कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करे जिससे लोक सेवक, जनसाधारण को या सम्पति को संकट, क्षोभ, क्षति, बाधा करें)।

धारा - 269 = ऐसा विधि विरुद्ध या लापरवाही से संक्रमण फैलाना। ⚠

धारा - 272 = खाद्य पदार्थों में विक्रय के लिए अपमिश्रण मिलाना। जानते हुए।⚠

धारा - 277 = किसी लोक (सार्वजनिक ) जल स्त्रोत को गंदा जानते हुए करना। ⚠

धारा - 278 = वायु मण्डल को दुषित करना जानते हुए। ⚠

धारा - 279 = लोक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना या हाँकना। ⚠

धारा - 292 = अश्लील सामग्री का विक्रय, आयात, निर्यात या किराए पर देना (लोकहित में, ऐतिहासिक, धार्मिक, स्मारक या पुरातत्व में लागू नही)। ⚠

धारा - 293 = तरूण व्यक्ति (-20 वर्ष ) तक अश्लील सामग्री किसी भी तरह पहुंचाना।⚠

धारा - 294 = किसी लोक स्थान पर अश्लील कार्य और गाने गाना जिससे दुसरो को क्षोभ होता। ⚠

🛂धर्म से संबंधित अपराध🛂

धारा - 295 = किसी धर्म के लोगों का अपमान के आशय से पुजा के स्थान को क्षतिग्रस्त या अपवित्र करना। ⚠

धारा - 295.क = द्वेषपूर्ण कार्य जो किसी धर्म के धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय किया हो (लेख से, चित्र से, सकेंत से आदि )।⚠

🛂मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध🛂


धारा - 299 = आपराधिक मानव वध करना।

धारा - 300 = हत्या (murder )।

धारा - 301 = जिस व्यक्ति को मारने का इरादा था लेकिन दुसरे को मार दिया। यह हत्या होगी।

धारा - 302 = हत्या का दण्ड (मृत्यु दण्ड या कठोर या सादा अजीवन कारावास और जुर्माना। )। ⚠⚠⚠

धारा - 303 = अजीवन कारावास सिद्ध दोष, पुनः हत्या करना। मृत्यु दण्ड। ⚠⚠⚠

धारा - 304 = हत्या की कोटि में न आने वाले अपराधिक मानव वध।⚠⚠

धारा - 304. क = लापरवाही (उपेक्षा ) से मृत्यु कारित करना। (कठोर या सादा कारावास दो वर्ष या जुर्माना या दोनों )। ⚠

धारा - 304. ख = दहेज हत्या (विवाह के सात साल के पहले )। ⚠

धारा - 306 = कोई व्यक्ति आत्महत्या करे तो जो ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करे, उकसाये। ⚠

धारा - 307 = मृत्यु कारित करने के आशय से मृत्यु कारित करने का असफल प्रयास करना। (302 का असफल होना )। ⚠

धारा - 308 = 304 का असफल प्रयास करना। ⚠

🛂चोट पहुंचाने के अपराध🛂

धारा - 319 = किसी व्यक्ति को साधारण क्षति या चोट पहुंचाने।

धारा - 320 = किसी व्यक्ति को गम्भीर चोट पहुंचाना (1.पुंसत्वहर 2.दृष्टि का स्थायी विच्छेद करना 3.श्रवण शक्ति का स्थायी विच्छेद करना 4. किसी अंग या जोड़ का विच्छेद करना 5.जो चोट बीस दिन तक असहनीय हो 6.किसी अंग का स्थायी हासिल 7. सिर में गंभीर चोट ) आदि।

धारा - 321 = स्वेच्छा से उपहति (चोट) पहुंचाना।

धारा - 322 = स्वेच्छा से घोर उपहति (गम्भीर चोट ) पहुंचाना।

धारा - 323 = 321 का दण्ड (एक वर्ष या जुर्माना(-1000 ) या दोनों )। ⚠

धारा - 324 = खतरनाक हत्यार या आयुद्ध द्वारा स्वेच्छा से चोट पहुंचाना। ⚠

धारा - 325 = 322 का दण्ड(सात वर्ष और जुर्माना )। ⚠

धारा - 326 = खतरनाक हत्यार या आयुद्ध द्वारा स्वेच्छा से गम्भीर चोट पहुंचाना। ⚠

धारा - 326.क = अम्ल आदि का प्रयोग करके आशिंक या गम्भीर चोट स्वेच्छा से पहुंचाना। ⚠⚠

धारा - 326.ख = अम्ल आदि का प्रयोग करके स्वेच्छा से चोट पहुंचाने का प्रयास करना। ⚠

धारा - 330 = किसी को किसी भी बात पर जबरदस्ती संस्वीकृति (कुबूल ) कराना। ⚠

धारा - 332 = कोई व्यक्ति लोक सेवक को उसकी ड्यूटी पर स्वेच्छा से चोट पहुंचाता है। ⚠

धारा - 333 = कोई व्यक्ति लोक सेवक को उसकी ड्यूटी पर गम्भीर चोट पहुंचाता है।के लिए दण्ड। ⚠

🛂सदोष अवरोध और सदोष परिरोध 🛂

धारा - 339 = सदोष अवरोधे( किसी मार्ग में जाने से रोकना जहां अधिकार हो स्वेच्छा से)

धारा - 340 = किसी व्यक्ति को बिना सहमति के बिना बल के या बल से रोक कर रखे।

धारा - 341 = धारा - 339 का दण्ड (एक महीने का सादा कारावास या 500 रु०तक का जुर्माना या दोनों )। ⚠

धारा - 342 = धारा - 340 का दण्ड (सादा या कठोर एक वर्ष का कारावास या 1000 र० तक का जुर्माना या दोनों )। ⚠

🛂आपराधिक बल और हमले के विषय में 🛂

धारा - 350 = किसी व्यक्ति पर उसकी बिना सहमति के व अपनी स्वेच्छा से बल प्रयोग करना (1.धक्का देना 2 . थप्पड़ मारना 2.पत्थर मारना आदि )।

धारा - 351 = हमला करना। (मुक्का मारना,आदि )

धारा - 353 = सरकारी सेवक को अपने कर्तव्य से रोकने के लिए हमला। ⚠

धारा - 354 = किसी स्त्री की लज्जा भंग (बेइज्जती ) करने के आशय से हमला करना। ⚠

धारा - 354 क = लैंगिक उत्पीड़न करना। (1 . लैंगिक स्वीकृति के लिए अनुरोध करना। 2.टीप्पणि करना 3.स्त्री की इच्छा के विरुद्ध अश्लील वीडियो, साहित्य दिखाना आदि। ) ⚠

धारा - 354 ख = निर्वस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला करना। ⚠

धारा - 354 ग = कोई पुरुष एकान्त में किसी स्त्री को एक टक देखने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 354 घ = स्त्री का पीछा करना (स्त्री की बिना इच्छा के इन्टरनेट, मोबाइल आदि पर संपर्क करना। ) ⚠

धारा - 356 = किसी के द्वारा चोरी के प्रयत्न करने के आशय से हमला करना। ⚠

🛂अपहरण, व्यपहरण, बाल श्रम के विषय 🛂


धारा - 359 = व्यपहरण (किडनैपिंग ) यह दो प्रकार का होता है 1. भारत से ले भागना 2. संरक्षक की हिफाजत से ले भागना।

धारा - 360 = भारत से ले भागना। (बिना रंजा बदी के )

धारा - 361 = जायज संरक्षक की संरक्षकता से ले भागना।

धारा - 362 = अपहरण (किसी व्यक्ति को धमकाकर, डराकर, विवश कर या धोखा देकर अपहरण करना आदि। )

धारा - 363 = व्यपहरण के लिए दण्ड (सादा या कठोर कारावास और जुर्माना )। ⚠

धारा - 363 क = यदि कोई अवयस्क का व्यपहरण करेगा, अभिरक्षा करेगा भीख मांगाने के लिए, विकलांग करेगा, करतब दिखावगा आदि। ⚠⚠

धारा - 364 = हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण करना। ⚠⚠

धारा - 364 क = फिरौती के लिए अपहरण या व्यपहरण। ⚠

धारा - 365 = सदोष परिरोध (गुप्त रिति से बेजा तौर) पर बंद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण। ⚠

धारा - 366 = किसी स्त्री को विवाह आदि करने के लिए विवश करने को व्यपहरण या उत्प्रेरित करना। ⚠

धारा - 366 क = अव्यंस्क, - 18 वर्ष लडकी का उपापन (सम्भोग करना ) को अन्य व्यक्ति से सम्भोग करने के लिए विवश व्यपहरण या अपहरण। ⚠

धारा - 366 ख = विदेश से लडकी (-21 वर्ष की ) का अयात करना। ⚠

धारा - 370 = किसी व्यक्ति का दास के रूप के लिए अपहरण या व्यपहरण।

धारा - 370 क = जिसका दुर्व्यापार किया है (अवयस्क का किसी भी रिति में लैंगिक शोषण करेगा। )। ⚠

🛂🛂बलात्कार 🛂🛂

धारा - 375 = बलात्संग (बलात्कार ) - यदि कोई पुरुष करे।

(स्त्री की बिना सहमति के, स्त्री की इच्छा के विरुद्ध आदि )

धारा - 376 = बलात्संग के लिए दण्ड।⚠⚠

धारा - 376 क = बलात्संग पीड़ित की मृत्यु या लगातार विकृतशील दशा कारित करते के लिए दण्ड। ⚠⚠⚠

धारा - 376 ख - पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ पृथ्थक्करण (अलग होने पर ) मैथुन (सेक्स) करने पर। ⚠

धारा - 376 ग = प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन। ⚠

धारा - 376 घ = सामुहिक बलात्संग। ⚠⚠

धारा - 376 ड़ = पुनरावृत्तिकर्ता अपराधियों के लिए दण्ड। ⚠⚠⚠

धारा - 377 = प्रकृति विरुद्ध अपराधों के विषय में। ⚠⚠

🛂सम्पति के विरुद्ध अपराधों के विषय में चोरी के विषय में 🛂

धारा - 378 = चोरी की परिभाषा।

धारा - 379 = चोरी के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 380 = निवास गृह आदि में चोरी। ⚠

🛂उद्दापन के विषय में (अपकर्षण या दबाव डालकर चोरी करना ) 🛂

धारा - 383 = उद्दापन - जो कोई व्यक्ति को स्वयं उस व्यक्ति को या किसी व्यक्ति अन्य व्यक्ति की कोई क्षति करने के भय में साशय डालता।

धारा - 384 = उद्दापन के लिए दण्ड। ⚠

🛂लूट और डकैती 🛂

धारा - 390 = लूट की परिभाषा।

धारा - 391 = डकैती (पाँच या ज्यादा व्यक्ति लूट करते हैं )।

धारा - 392 = लूट के लिए दण्ड।⚠

धारा - 393 = लूट करने का प्रयत्न करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 394 = लूट करने में स्वेच्छा से चोट पहुंचाना। ⚠⚠

धारा - 395 = डकैती के लिए दण्ड। ⚠⚠

धारा - 396 = हत्या सहित डकैती। ⚠⚠

धारा - 397 = मृत्यु या गम्भीर चोट कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती। ⚠

धारा - 398 = खतरनाक हत्यार लेकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न। ⚠

धारा - 399 = कोई डकैती करने के लिए तैयारी करना। ⚠

धारा - 400 = डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 401 = चोरों की टोली का होने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 402 = डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना। ⚠

🛂सरकारी सम्पति का दुरुपयोग 🛂

धारा - 406 = किसी पर व्यक्ति सरकारी सम्पति का दुरुपयोग करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 409 = लोक सेवक द्वारा सरकारी सम्पति का दुरुपयोग करने पर दण्ड। ⚠

🛂चुराई हुई सम्पति प्राप्त करना 🛂


धारा - 411 = चुराई हुई सम्पति को बेईमानी से प्राप्त करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 412 = ऐसी सम्पति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती के लिए चुराई है के लिए दण्ड। ⚠

🛂 छल 🛂

धारा - 415 = छल - किसी व्यक्ति को धोखे से, कपट से, बेईमानी से, आदि से उत्प्रेरित करें और मानसिक, शारीरिक, व आर्थिक हो या सम्भावना हो।

धारा - 416 = प्रतिरूपण (रूप बदलकर ) द्वारा छल करना।

धारा - 417 = छल करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 418 = प्रतिरूपण (रूप बदलकर ) द्वारा छल करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 420 = छल करके हानि पहुंचाना। (छल का कार्य पूर्ण करना ) ⚠


🛂रिष्टि(नुकसान करना ) 🛂

धारा - 425 = रिष्टि ( '' क''' किसी व्यक्ति या सम्पति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे और ''क" को कोई लाभ नहीं हुआ। )

धारा - 426 = "रिष्टि" के लिए दण्ड।⚠

धारा - 435 = सौ रुपए का या दस रुपये का नुकसान कारित करने के के आशय से विस्फोटक पदार्थ या अग्नि द्वारा हानि। ⚠

धारा - 436 = गृह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा हानि। ⚠

🛂आपराधिक अतिचार 🛂

धारा - 441 = आपराधिक अतिचार की परिभाषा।

धारा - 442 = गृह अतिचार की परिभाषा।। ⚠

धारा - 447 = आपराधिक अतिचार के लिए दण्ड।। ⚠

धारा - 448 = गृह अतिचार के लिए दण्ड।। ⚠

धारा - 452 = हमला, उपहति या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गृह अतिचार।। ⚠

धारा - 457 = कारागार से दण्डनीय अपराध करने के लिए रात्रि में छिपकर गृह अतिचार या गृह भेदन। ⚠

धारा - 460 = गृह अतिचार या गृह भेदन में सख्त चोट या मृत्यु कारित करन के लिए दण्ड। ⚠⚠

🛂दस्तावेजों या सम्पति चिन्ह सम्बन्धी अपराध 🛂

धारा - 463 = कूट रचना की परिभाषा।

धारा - 464 = मिथ्या दस्तावेज बनान।। क्या है।।

धारा - 468 = छल के अर्थ में कूट रचना। के लिए दण्ड। ⚠

🛂करेन्सी और बैंक नोटों के अपराध 🛂

धारा - 489 क = करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को जाली बनाने के लिए दण्ड। ⚠

धारा 489 ख= जाली करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को असली रूप में प्रयोग करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 489 ग = जाली करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को कब्जे में रखने के लिए दण्ड । ⚠

धारा धारा - 489 घ = जाली नोटों को बनाने के उपकरण को कब्जे में रखने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 489 ड = करेन्सी नोटों या बैंक नोटों से मिलते हुये दस्तावेजों का बनाना या उनका उपयोग में लाने के लिए दण्ड। ⚠

🛂विवाह सम्बन्धी अपराध 🛂


धारा - 494 = पति या पत्नी के जीवन काल में दुबारा विवाह करना। ⚠

धारा - 497 = जारकर्म के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 498 क = किसी स्त्री के पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता का व्यवहार करने के लिए दण्ड । ⚠

🛂अपराध पुर्ण धमकी, तौहीन तथा परेशानी के बारे में 🛂


धारा - 504 = सर्वसाधरण को कष्ट पैदा करने की नीयत से जानबूझकर तौहीन करने के लिए दण्ड।। ⚠

धारा - 506 = अपराध पूर्ण धमकी के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 509 = किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशय से कोई कार्य करने के लिए दण्ड। ⚠

धारा - 511 = उन अपराधों को करने की कोशिश के लिए दण्ड जिनमें उम्र कैद का दण्ड दिया जा सकता है।। ⚠


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