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Thursday, 23 February 2017

Maharashi Charaka - महर्षि चरक - An Introduction PDF Download



महर्षि चरक को औषधि का जनक कहा जाता है।
महर्षि चरक की शिक्षा तक्षशिला में हुई ।
महर्षि चरक का जन्म किस काल या समय में हुआ, इस बात का कोई पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि भारत के पौराणिक इतिहास में भी इससे जुड़ा कोई तथ्य नहीं मिलता।

त्रिपिटक का जब चीनी अनुवाद हुआ तो उसमें चरक ऋषि को कनिष्क का राजवैद्य बताया गया लेकिन चरक संहिता बौद्ध मत का विरोध करती है इसलिए ये बात प्रमाणित नहीं कही जा सकती। हां, इस बात से यह अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है कि चरक ऋषि का संबंध कनिष्क के काल से रहा होगा।

एक मत के अनुसार चरक व्यक्ति न होकर कृष्ण यजुर्वेद की शाखा का नाम है और 'चरक संहिता' का संकलन उसी शाखा के किसी व्यक्ति ने किया हो। जो भी हो चरक के ग्रंथ की ख्याति विश्व-व्यापी रही है।
महर्षि चरक पहले ऐसे चिकित्सक थे जिन्होंने चयापचय, शरीर प्रतिरक्षा और पाचन से संबंधित रोगों को पहचाना और उनका निदान करने के उपाय बताए।
महर्षि चरक ने ही सर्वप्रथम मानव शरीर में मौजूद तीन स्थायी दोषों, वात, पित्त और कफ को पहचाना और इनकी अवधारणा को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया।
महर्षि चरक के अनुसार शरीर में मौजूद वात, पित्त और कफ जैसे स्थायी दोष जब तक संतुलित अवस्था में रहते हैं, तभी तक इंसान का शरीर स्वस्थ रहता है। जैसे ही इनके बीच मौजूद संतुलन बिगड़ने लगता है, मानव शरीर रोग ग्रस्त हो जाता है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए ये बहुत जरूरी है कि व्यक्ति इन तीनों के बिगड़ते संतुलन को पहचाने और उसे सही करने का प्रयास करे।
चरक संहिता की उत्पत्ति –
हिन्दू धर्म में त्रिदेवों का विशेष महत्व है, जिनमें ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता, विष्णु को पालनहार और महेश को विनाशक कहा जाता है। पौराणिक दस्तावेजों के अनुसार जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना संपन्न कर ली तब उन्होंने देखा कि उनके बनाए हुए मानव भिन्न-भिन्न रोगों की चपेट में आते जा रहे हैं।

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए जब असुरों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन हुआ तब स्वयं भगवान विष्णु ही धनवंतरि का रूप लेकर समुद्र में से निकले और उन्होंने ही आयुर्वेद की रचना की। माना जाता है कि सर्वप्रथम ब्रह्मा ने आयुर्वेद का ज्ञान अपने पुत्र प्रजापति को प्रदान किया और प्रजापति से यह ज्ञान अश्विन कुमारों तक पहुंचा और अश्विन कुमारों ने आयुर्वेद के ज्ञान को इन्द्र देव को प्रदान किया।

कहते हैं एक बार धरती पर फैली महामारियों के प्रकोप से हजारों की संख्या में मनुष्य अपनी जान गंवाते जा रहे थे। इस बात से देवता और ऋषि-मुनि सभी परेशान थे। इस समस्या का निदान पाने के लिए प्रमुख ऋषि-मुनियों ने हिमालय में एक सभा बुलाई और उस सभा में सर्वसम्मति के साथ ऋषि भारद्वाज को प्रमुख बनाकर इन्द्र देव के पास आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेजा। इंद्र देव ने समस्त ज्ञान ऋषि भरद्वाज को प्रदान किया और बाद में भारद्वाज ऋषि ने अपने शिष्यों, आत्रेय और पुनर्वसु को यह ज्ञान प्रसारित किया।

इसके बाद अत्रेय-पुनर्वसु के शिष्यों ने अपनी प्रतिभानुसार आयुर्वेद के ग्रंथों की रचना की। इनमें आत्रेय-पुनर्वसु के शिष्य अग्निवेश ने अग्निवेश संहिताकी रचना की जिसे कालांतर में चरक संहिताभी कहा गया, क्योंकि इसका संपादन महर्षि चरक द्वारा किया गया था।

चरक संहिता की रचना संस्कृत भाषा में हुई और कहीं-कहीं इसमें पालि भाषा के भी शब्द मिलते हैं। इस संहिता को गद्य और पद्य दोनों में ही लिखा गया है और इसे आठ स्थान और 120 अध्यायों में विभाजित किया गया है।
चरक संहिता में व्याधियों के उपचार तो बताए ही गए हैं, प्रसंगवश स्थान-स्थान पर दर्शन और अर्थशास्त्र के विषयों की भी उल्लेख है।
आठवीं शताब्दी में इस ग्रंथ का अरबी भाषा में अनुवाद हुआ और यह शास्त्र पश्चिमी देशों तक पहुंचा।
'चरक संहिता' आज भी वैद्यक का अद्वितीय ग्रंथ माना जाता है।

'चरक संहिता' के आठ स्‍थान निम्‍नानुसार हैं
1. सूत्रस्‍थान - इस भाग में औषधि विज्ञान, आहार, पथ्‍यापथ्‍य, विशेष रोग और शारीरिक तथा मानसिक रोगों की चिकित्‍सा का वर्णन किया गया है।
2. निदानस्‍थान - आयुर्वेद पद्धति में रोगों का कारण पता करने की प्रक्रिया को निदान कहा जाता है। इस खण्‍ड में प्रमुख रोगों एवं उनके उपचार की जानकारी प्रदान की गयी है।
3. विमानस्‍थान - इस अध्‍याय में भोजन एवं शरीर के सम्‍बंध को दर्शाया गया है तथा स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक भोजन के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है।
4. शरीरस्‍थान - इस खण्‍ड में मानव शरीर की रचना का विस्‍तार से परिचय दिया गया है। गर्भ में बालक के जन्‍म लेने तथा उसके विकास की प्रक्रिया को भी इस खण्‍ड में वर्णित किया गया है।
5. इंद्रियस्‍थान - यह खण्‍ड मूल रूप में रोगों की प्रकृति एवं उसके उपचार पर केन्द्रित है।
6. चिकित्‍सास्‍थान - इस प्रकरण में कुछ महत्‍वपूर्ण रोगों का वर्णन है। उन रोगों की पहचान कैसे की जाए तथा उनके उपचार की महत्‍वपूर्ण विधियाँ कौन सी हैं, इसकी जानकारी भी प्रदान की गयी है।
7. और  8. साधारण बीमारियाँ - ये अपेक्षाकृत छोटे अध्‍याय हैं, जिनमें साधारण बीमारियों के बारे में बताया गया है।

ध्यान दें
आयुर्वेद की सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाने वाली चरक संहितामें भारत के अलावा यवन, शक, चीनी आदि जातियों के खानपान और जीवनशैली का भी जिक्र मिलता है। इस पुस्तक को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित भी किया जा चुका है। अरब के प्रसिद्ध इतिहासकार और विद्वान अल-बरूनी ने भी कहा था हिन्दुओं की एक पुस्तक चरक के नाम से प्रसिद्ध है, जो कि औषधि की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक मानी जा सकती है।


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Tuesday, 7 February 2017

Hindi Synonyms - हिंदी पर्यायवाची शब्द:

Hindi Synonyms - हिंदी पर्यायवाची शब्द:



  1. अग्नि: आग, अनल, पावक, दहन, वह्नि
  2. अतिथि: अभ्यागत, पाहुन, मेहमान, आगन्तुक।
  3. अमृत: सुधा, सोम, पीयूष, अमी, अमिय, सुरभोग, देवभोग।
  4. अपमान: अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, अवमान, तिरस्कार।
  5. अलंकार: आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर।
  6. अश्व: घोडा़ , हय, हरि, घोटक, बाजि, तुरंग।
  7. असुर: दनुज, दैत्य, दानव, राक्षस, तमचर, निशाचर, रजनीचर
  8. अहंकार: गर्व, दर्प, घमण्ड, मद, मान।
  9. अंधकार: तम, तमस, तिमिर, तमिस्र, अंधेरा, अंधियारा।
  10. आकाश: नभ, गगन, अम्बर, अन्तरिक्ष, अनन्त, व्योम
  11. आँख: नत्रे , नयन, चक्षु, लोचन, दृग, अक्षि।
  12. इच्छा: आकांक्षा, अभिलाषा, कामना, चाह, लिप्सा, लालसा।
  13. इन्द्र:  सुरपति, देवराज, मेघराज, शक्र, शचीपति
  14. उपवन: बाग, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन।
  15. कच: बाल, कुन्तल, चिकुर, अलक, रोम, शिरारूे ह।
  16. कण्ठ: ग्रीवा, गर्दन, गला, शिरोधरा।
  17. कपड़ा: पट, चीर, वसन, अम्बर, वस्त्र, दुकूल, परिधान।
  18. कबूतर: कपाते , रक्तलोचन, पारावत, कलरव, हारिल।
  19. कमल: जलज, पंकज, सराजे , अरविन्द, राजीव, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर।
  20. कान: कणर्, श्रवण, श्रोत, श्रुितपटु ।
  21. कामदेव: मदन, मनोज, अनगं , काम, रतिपति, पष्ु पधन्वा, मन्मथ।
  22. किनारा: तीर, कूल, कगार, तट।
  23. किरण: कर, अंशु, रश्मि, मरीचि, मयूख, प्रभा।
  24. कीत्र्ति: यश, प्रसिद्धि।
  25. खग: पक्षी, द्विज, विहग, नभचर, अण्डज, शकुनि, पखेरू।
  26. गणेश: विनायक, गजानन, लम्बादे र, गणपति, एकदन्त।
  27. गुरु: शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय।
  28. गृह: घर, गेह, सदन, निकते न, भवन, आलय, मंदिर।
  29. चन्द्रमा:  शशि, विधु, सुधांशु, हिमांशु।
  30. चरण: पैर, पाद, पग, पद, पाँव।
  31. चाँदनी: चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाइर्।
  32. जगत्: संसार, विश्व, जग, जगती, भव, दुनिया, लाके , भुवन।
  33. जल: वारि, अम्बु, तोय, नीर, सलिल, जीवन, पय।
  34. जीभ: रसना, रसज्ञा, जिह्वा, रसिका, वाणी, वाचा, जबान।
  35. ज्योति: आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा, भा, रुचि, रोचि।
  36. तरुवर:  द्रुम, तरु, विटप, रूंख, पादप।
  37. तलवार: असि, कृपाण, करवाल, खडग् , चन्दह्र ास।
  38. तालाब: जलाशय, सर, तडा़ ग, सरावे र, पुष्कर।
  39. तीर: शर, बाण, विशिख, शिलीमुख, अनी, सायक।
  40. दधि: दही, गारे स, मट्ठा, तक्र।
  41. दाँत: दशन, रदन, रद, द्विज, दन्त, मुखखुर।
  42. दास: सेवक, अनुचर, चाकर, भृत्य, किकं र, परिचारक।
  43. दिन: दिवस, वार, वासर, अह्न, दिवा।
  44. दीन: गरीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंकाल।
  45. दीपक: दीप, दीया, प्रदीप।
  46. दुर्गा: चण्डी, चामुण्डा, कल्याणी, कालिका, भवानी।
  47. दूध: दुग्ध, पय, क्षीर, गौरस, स्तन्य।
  48. देवता: दवे , अजर, अमर, सुर, विबुध।
  49. देह: काया, तन, शरीर, वपु, गात।
  50. द्रव्य: धन, अथर्, वित्त, सम्पदा, दालै त, वस्तु, पदार्थ।
  51. धन: द्रव्य, वित्त, अर्थ, सम्पत्ति, पूंजी, राशि, मुद्रा।
  52. धनुष: चाप, कमान, कादे ण्ड, सरासन, पिनाक, सारंग।
  53. नदी: सरिता, तटिनी, तरंगिनी, आपगा, शैलजा, निर्झरिणी।
  54. नाव: नौका, तरणी, वनवाहन, जलयान, पाते , नयै ा, तरी।
  55. पत्थर: पाषाण, प्रस्तर, उपल, पाहन, शिलाखण्ड।
  56. पत्ता: दल, पल्लव, पर्ण, दु्रमदल, किसलय, पान, पत्र।
  57. पति: कातं , ईश, स्वामी, भरतार, वल्लभ, प्राणेश, नाथ।
  58. पथ: बाट, मार्ग, राह, पंथ, रास्ता, मग।
  59. पर्वत: पहाड़, अचल, गिरि, भूधर, नग, महीधर, शलै , मेरू।
  60. पशु: चतुष्पद, जानवर, चैपाया, मृग।
  61. पाताल: रसातल, नागलाके , अधोभुवन, उरगस्थान।
  62. पार्वती: शिवा, उमा, भवानी, गिरिजा, शलै सुता, अम्बिका।
  63. पास: आसन्न, निकट, समीप, सामीप्य, सन्निकट, उपकण्ठ, सानिध्य।
  64. पुत्र: सुत, तनय, आत्मज, पूत, तनजु , तात, नन्दन, लाल।
  65. पुत्री: सुता, तनया, आत्मजा, तनुजा, नन्दिनी, दुहिता, बेटी।
  66. पुष्प:  सुमन, प्रसून, फूल, पहु ुप, गुल।
  67. प्रातः: प्रभात उषा, अरुणोदय, सुबह, अहर्मुख
  68. प्रवाल: मूँगा, विद्रुम, रक्तांग, लतामणि, रक्तमणि।
  69. फल: परिणाम, नतीजा, लाभ, प्रभाव।
  70. बन्दर: कपि, हरि, मर्कट, वानर, शाखामृग।
  71. बसन्त: ऋतुराज, मधु, पिकानन्द, मधुमास, कुसुमाकर, मदनमीत।
  72. ब्रह्म: विधि, विधाता, चतुरानन, स्वयंभू, प्रजापति।
  73. बादल: मेघ, घन, जलद, धाराधर, नीरद।
  74. बालक: शिशु, बच्चा, बाल, कुमार, किशोर, लड़का, शावक।
  75. ब्राह्मण: द्विज, विप्र, भूसुर, भूदेव, महीदवे , अग्रजन्मा।
  76. बिजली: विद्युत, चपला, चचं ला, तडित, सौदामिनी, दामिनी।
  77. बुद्धि: धी, मति, प्रज्ञा, मनीषा।
  78. भाई: बन्धु, सहोदर, भा्र ता, तात, सगर्भा, सजाता।
  79. भौंरंरा: भम्र र, मधकु र, मधुप, अलि, षटप् द, भृंग।
  80. मक्खन: नवनीत, माखन, दधिसार, लौनी।
  81. मनुष्य: नर, मानव, जन, मनुज, मानुष, मत्र्य, आदमी।
  82. महादेव: शिव, शंभु, शंकर, पशुपति, त्रिनेत्र, हर, नीलकंठ।
  83. माता: मा, अम्बा, जननी, प्रसू, मात, जन्मदायिनी, अम्ब।
  84. मुख: आनन, वदन, वक्र, मुँह, चेहरा।
  85. मूर्ख: अज्ञ, जड़, अज्ञानी, निर्बुद्धि।
  86. मेंढ़क: मण्डकू , दादुर, हरि, भेक, शालूर, वर्षाभू।
  87. मृग: सारंग, कस्तूरी, चमरी, कृष्णसार, हरिण।
  88. मृत्यु: निधन, मरण, देहान्त, मौत, स्वगर्व ास।
  89. युद्ध: रण, समर, संग्राम, जंग, विग्रह, लड़ाई।
  90. युवक: युवा, तरुण, जवान, नवयुवक, नौजवान।
  91. युवती: तरुणी, श्यामा, नवयौवना, नवांगना।
  92. रमा: लक्ष्मी, कमला,  इन्दिरा, श्री, सिन्धुजा, विष्णुप्रिया।
  93. रवि: भानु, सूर्य, आदित्य, दिनकर, दिनेश, मार्तण्ड।
  94. राजा: नृप, भूप, नृपति, नरेश, महीप, नरेन्द, महीपाल।
  95. रात: रात्रि, निशा, शर्वरी, रजनी, यामिनी, राका, विभावरी।
  96. रानी: राजवधू, राज्ञी, महारानी, महाराज्ञी, राजपत्नी।
  97. लहर: तरंग, हिलोर, ऊर्मि, वीचि, लहरी।
  98. वज्र: कुि लश, पवि, अशनि, भेदी, भिदुर, दंभोलि।
  99. विद्वान्: काेि वद, पण्डित, प्राज्ञ
  100. विष: जहर, गरल, हलाहल, कालकटू , गर।
  101. विवाह: पाणिग्रहण, ब्याह, शादी, परिणय, प्रणय सूत्रबन्धन।
  102. विष्णु: जनार्दन, चक्रपाणि, रमेश, गदाधर, दामोदर।
  103. शत्रु: अरि, दुश्मन, विपक्षी, अमित्र, द्वेषी।
  104. शुक: तोता, कीर, सुग्गा, दाड़िम-प्रिय, रक्ततुण्ड, सुआ।
  105. सखी: सहचरी, आली, सजनी, सहेली
  106. सन्ध्या: साँझ, शाम, सायं, दिनांत, गोधूलि
  107. सर्प: अहि, भुजगं , विषधर, व्याल, फणी, नाग, उरग।
  108. समुद्र: सागर, सिंधु, रत्नाकर, उदधि, पयोधि, पारावार।
  109. सरस्वती: भारती, गिरा, शारदा, वीणापाणि, हंसवाहिनी।
  110. सिंह: शार्दूल, कसे री, हरि, वनराज, मृगराज।
  111. सेना: कटक, अनी, चम, वाहिनी, सैन्य, फाजै ।
  112. स्वर्ग: सुरलाके , देवलाके , नाग, इन्द्रपुरी
  113. स्त्री: नारी, कामिनी, महिला, अबला, ललना, रमणी, तिय।
  114. हृदय: उर, हिय, वक्ष, वक्षस्थल, हृद।
  115. हनुमान: पवनसुत, महावीर,  मारुति, अंजनिसुत, मारुतनन्दन।
  116. हाथ: हस्त, कर, पाणि, बाह
  117. हाथी: गज, हस्ती, कुंजर, मातंग, द्विरद, द्विप, नाग, करि।
  118. हंस: मराल, चक्रांग, कलहंस, कारडं व, सरस्वतीवाहन।


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Hindi Antonyms - हिंदी विलोम अर्थ शब्द:

जटिल विलोम  शब्द:  

Hindi Antonyms - हिंदी विलोम अर्थ शब्द:


अनुग्रह-      विग्रह, कोप
विग्रह         समास
समास        व्यास
सन्धि         विग्रह, विच्छेद
आकाश -    पाताल
अवनि        अम्बर
गगन          धरती
अंधेरा        उजाला
तिमिर        आलोक, प्रकाश
आलोक     अंधकार
अंधकार     प्रकाश
ज्योति        तम
अज्ञ           विज्ञ, प्रज्ञ
अभिज्ञ       अनभिज्ञ
अल्पज्ञ       सर्वज्ञ, बहुज्ञ
विज्ञ           अज्ञ
न्यून           अधिक
अति          अल्प
अल्प         बहु
लघु           दीर्घ
दीर्घ           ह्रस्व
ह्रस्व          दीर्घ
विकास      ह्रास
ह्रास          वृद्धि
वृद्धि         संक्षेपण
पल्लवन    संक्षेपण
सूक्ष्म         स्थूल
गुरु           लघु
अधम        उत्तम
महान        तुच्छ
क्षुद्र          विराट
विराट        लघु
लघु           दीर्घ
दीर्घ          ह्रस्व
क्षीण         पुष्ट
अल्पायु      दीर्घायु
स्वल्पायु     चिरायु
चिरंतन      नश्वर
नश्वर         शाश्वत
शास्वत     क्षणिक
कुटिल       सहज, सरल
सरल         जटिल, कुटिल, वक्र
जटिल       सरल
उग्र           सौम्य
भीषण       सौम्य
सरस         नीरस
रसिक        नीरस
मसृण        रुक्ष
रुक्ष           मृदु, मसृण
मृदुल         कठोर
कठोर        कोमल
कर्कश       मधुर
मधुर          कटु
सौम्य        उग्र
कड़वा      मीठा
खट्टा        मीठा
कडा        मुलायम
उद्धत       विनीत
विनीत      दुर्विनीत, उद्दंड, उद्धत
धृष्ट          विनम्र
मौन          मुखर
मूक          वाचाल
आकुंचन    प्रसारण
प्रसारण      संकुचन
विस्तार       संक्षेप
विस्तृत       संक्षिप्त
संकीर्ण       विस्तीर्ण
एकत्र         सर्वत्र
आकीर्ण     विकीर्ण
संयुक्त        वियुक्त
फैलना       सिकुड़ना
आयोजन   वियोजन
वियोजन    संयोजन
वियोग       संयोग
अगाध       छिछला
गहरा         उथला
राग           विराग
विराग        अनुराग
अनुराग      विराग
अनुरक्त     विरक्त
अनुरक्ति    विरक्ति
विरक्त       अनुरक्त, आसक्त
आसक्त     उदासीन, अनासक्त
रत            विरत
विरत        निरत
शेष          अशेष
अवशेष    निःशेष
उन्मूलन    रोपण
उन्मीलन   निमीलन
अनिवार्य   ऐच्छिक
ऐच्छिक    अनैच्छिक
अगम       सुगम
दुर्गम        सुगम
उत्पत्ति     विनाश
उत्थान     पतन
उत्कर्ष      अपकर्ष
वैभव        पराभव
विभव       पराभव
उद्भव        पराभव, अवसान
आविर्भाव   तिरोभाव
ऊर्ध्व         अधः
उपरि         अधः
वेदना        आनंद
आंनद       शोक
शोक         हर्ष
हर्ष           विषाद
खेद          प्रसन्नता
सुख         दुःख
खीजना     रीझना
मग्न          दुखी
उल्लास     अवसाद
उपमान     उपमेय
उपमा       व्यतिरेक
आदर       निरादर
अपमान    सम्मान
आदरणीय अनादरणीय
विदाई       स्वागत
स्वागत      तिरस्कार
सत्कार      तिरस्कार
पुरस्कार     तिरस्कार
परितोष      दंड
दंड            पुरस्कार
पुरस्कार     तिरस्कार
आचार       अनाचार
कदाचार     सदाचार
सदाचार     दुराचार
गत           आगत
आगत       अनागत
गमन         आगमन
आगमन     प्रस्थान
निर्गमन      आगमन
        
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Wednesday, 1 February 2017

National and International Important days - राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय महत्वपूर्ण दिवस


National and international Important Days and Holidays

Here is a list of Important national and International Days -

1. लुईस ब्रेल दिवस – 4 जनवरी
2. विश्व हास्य दिवस – 10 जनवरी
3. राष्ट्रिय युवा दिवस – 12 जनवरी
4. थल सेना दिवस – 15 जनवरी
5. कुष्ठ निवारण दिवस – 30 जनवरी
6. भारत पर्यटन दिवस – 25 जनवरी
7. गणतंत्र दिवस – 26 जनवरी
8. अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद दिवस - 26 जनवरी
9. सर्वोदय दिवस – 30 जनवरी
10. शहीद दिवस – 30 जनवरी
11. विश्व कैंसर दिवस – 4 जनवरी
12. गुलाब दिवस – 12 फरवरी
13. वेलेंटाइन दिवस – 14 फरवरी
14. अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस – 21 फरवरी
15. केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस – 24 फरवरी
16. राष्ट्रिय विज्ञानं दिवस – 28 फरवरी
17. राष्ट्रिय सुरक्षा दिवस – 4 मार्च
18. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – 8 मार्च
19. के०औ०सु० बल की स्थापना दिवस – 12 मार्च
20. विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस – 15 मार्च
21. आयुध निर्माण दिवस – 18 मार्च
22. विश्व वानिकी दिवस – 21 मार्च
23. विश्व जल दिवस – 22 मार्च
24. भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहीद दिवस – 23 दिवस
25. विश्व मौसम विज्ञानं दिवस – 23 मार्च
26. राममनोहर लोहिया जयंती – 23 मार्च
27. विश्व टी०बी० दिवस – 24 मार्च
28. ग्रामीण डाक जीवन बिमा दिवस – 24 मार्च
29. गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस – 25 मार्च
30. बांग्लादेश का राष्ट्रिय दिवस– 26 मार्च
31. विश्व थियेटर दिवस – 27 मार्च
32. विश्व स्वास्थ दिवस – 7 अप्रैल
33. अम्बेदकर जयंती – 14 अप्रैल
34. विश्व वैमानिकी दिवस – 14 अप्रैल
35. विश्व हीमोफीलिया दिवस – 17 अप्रैल
36. विश्व विरासत दिवस – 18 अप्रैल
37. पृथ्वी दिवस – 22 अप्रैल
38. विश्व पुस्तक दिवस – 23 अप्रैल
39. विश्व श्रमिक दिवस – 1 मई
40. विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस – 3 मई
41. विश्व प्रवासी पक्षी दिवस – 8 मई
42. विश्व रेडक्रॉस दिवस – 8 मई
43. अंतर्राष्ट्रीय थैलीसिमिया दिवस – 8 मई
44. राष्ट्रिय प्रौधोगिकी दिवस – 11 मई
45. विश्व संग्रहालय दिवस – 18 मई
46. विश्व नर्स दिवस – 12 मई
47. विश्व परिवार दिवस – 15 मई
48. विश्व दूरसंचार दिवस – 17 मई
49. आतंकवाद विरोधी दिवस – 21 मई
50. जैविक विविधिता दिवस – 22 मई
51. माउन्ट एवरेस्ट दिवस – 29 मई
52. विश्व तम्बाकू रोधी दिवस – 31 मई
53. विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून
54. विश्व रक्तदान दिवस – 14 जून
55. अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति स्थापना दिवस – 6 जून
56. विश्व शरणार्थी दिवस – 20 जून
57. राष्ट्रिय सांख्यिकी दिवस – 29 जून
58. पी०सी० महालनोबिस का जन्म दिवस – 29 जून
60. भारतीय स्टेट बैंक की स्थापना दिवस – 1 जुलाई
61. चिकित्सक दिवस – 1 जुलाई
62. डॉ० विधानचंद्र राय का जन्म दिवस – 1 जुलाई
63. विश्व जनसंख्या दिवस – 11 जुलाई
64. कारगिल स्मृति दिवस – 26 जुलाई
65. विश्व स्तनपान दिवस – 1 अगस्त
66. विश्व युवा दिवस – 12 अगस्त
67. स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त
68. राष्ट्रिय खेल दिवस – 29 अगस्त
69. ध्यानचन्द्र का जन्म दिवस – 29 अगस्त
70. शिक्षक दिवस – 5 सितम्बर
71. अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस – 8 सितम्बर
72. हिंदी दिवस – 14 सितम्बर
73. विश्व-बंधुत्व एवं क्षमा याचना दिवस – 14 सितम्बर
74. अभियंता दिवस – 15 सितम्बर
75. संचयिता दिवस – 15 सितम्बर
76. ओजोन परत रक्षण दिवस – 16 सितम्बर
77. RPF की स्थापना दिवस – 20 सितम्बर
78. विश्व शांति दिवस – 21 सितम्बर
79. विश्व पर्यटन दिवस – 27 सितम्बर
80. अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस – 1 अक्टूबर
81. लाल बहादुर शास्त्री जयंती – 2 अक्टूबर
82. अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस – 2 अक्टूबर
83. विश्व प्रकृति दिवस – 3 अक्टूबर
84. विश्व पशु-कल्याण दिवस – 4 अक्टूबर
85. विश्व शिक्षक दिवस – 5 अक्टूबर
86. विश्व वन्य प्राणी दिवस – 6 अक्टूबर
87. वायु सेना दिवस – 8 अक्टूबर
88. विश्व डाक दिवस – 9 अक्टूबर
89. विश्व दृष्टि दिवस – 10 अक्टूबर
90. जयप्रकाश जयंती – 11 अक्टूबर
91. विश्व मानक दिवस – 14 अक्टूबर
92. विश्व एलर्जी जागरूकता दिवस – 16 अक्टूबर
93. विश्व खाद्य दिवस – 16 अक्टूबर
94. विश्व आयोडीन अल्पता दिवस – 21 अक्टूबर
95. संयुक्त राष्ट्र दिवस – 24 अक्टूबर
96. विश्व मितव्ययिता दिवस – 30 अक्टूबर
97. इंदिरा गाँधी की पुण्य तिथि – 31 अक्टूबर
98. विश्व सेवा दिवस – 9 नवम्बर
99. रा० विधिक साक्षरता दिवस – 9 नवम्बर
100. बाल दिवस – 14 नवम्बर
101. विश्व मधुमेह दिवस – 14 नवम्बर
102. विश्व विधार्थी दिवस – 17 नवम्बर
103. राष्ट्रिय पत्रकारिता दिवस – 17 नवम्बर
104. विश्व व्यस्क दिवस – 18 नवम्बर
105. विश्व नागरिक दिवस – 19 नवम्बर
106. सार्वभौमिक बाल दिवस – 20 नवम्बर
107. विश्व टेलीविजन दिवस – 21 नवम्बर
108. विश्व मांसाहार निषेध दिवस – 25 नवम्बर
109. विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस – 26 नवम्बर
110. राष्ट्रिय विधि दिवस – 26 नवम्बर

If we skipped any of the National and International Days which we count as Important or as holidays, Please do let us know in comment section below.
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Monday, 30 January 2017

Hindi one word substitutions - अनेक शब्दों का एक शब्द ( शब्द समूह )


Hindi one word substitutions - अनेक शब्दों का एक शब्द ( शब्द समूह )



वाक्यांश या शब्द–समूह -- शब्द

• हाथी हाँकने का छोटा भाला— अंकुश
• जो कहा न जा सके— अकथनीय
• जिसे क्षमा न किया जा सके— अक्षम्य
• जिस स्थान पर कोई न जा सके— अगम्य
• जो कभी बूढ़ा न हो— अजर
• जिसका कोई शत्रु न हो— अजातशत्रु
• जो जीता न जा सके— अजेय
• जो दिखाई न पड़े— अदृश्य
• जिसके समान कोई न हो— अद्वितीय
• हृदय की बातेँ जानने वाला— अन्तर्यामी
• पृथ्वी, ग्रहोँ और तारोँ आदि का स्थान— अन्तरिक्ष
• दोपहर बाद का समय— अपराह्न
• जो सामान्य नियम के विरुद्ध हो— अपवाद
• जिस पर मुकदमा चल रहा हो/अपराध करने का आरोप हो/अभियोग लगाया गया हो— अभियुक्त
• जो पहले कभी नहीँ हुआ— अभूतपूर्व
• फेँक कर चलाया जाने वाला हथियार— अस्त्र
• जिसकी गिनती न हो सके— अगणित/अगणनीय
• जो पहले पढ़ा हुआ न हो— अपठित
• जिसके आने की तिथि निश्चित न हो— अतिथि
• कमर के नीचे पहने जाने वाला वस्त्र— अधोवस्त्र
• जिसके बारे मेँ कोई निश्चय न हो— अनिश्चित
• जिसका भाषा द्वारा वर्णन असंभव हो— अनिर्वचनीय
• अत्यधिक बढ़ा–चढ़ा कर कही गई बात— अतिशयोक्ति
• सबसे आगे रहने वाला— अग्रणी
• जो पहले जन्मा हो— अग्रज
• जो बाद मेँ जन्मा हो— अनुज
• जो इंद्रियोँ द्वारा न जाना जा सके— अगोचर
• जिसका पता न हो— अज्ञात
• आगे आने वाला— आगामी
• अण्डे से जन्म लेने वाला— अण्डज
• जो छूने योग्य न हो— अछूत
• जो छुआ न गया हो— अछूता
• जो अपने स्थान या स्थिति से अलग न किया जा सके— अच्युत
• जो अपनी बात से टले नहीँ— अटल
• जिस पुस्तक मेँ आठ अध्याय होँ— अष्टाध्यायी
• आवश्यकता से अधिक बरसात— अतिवृष्टि
• बरसात बिल्कुल न होना— अनावृष्टि
• बहुत कम बरसात होना— अल्पवृष्टि
• इंद्रियोँ की पहुँच से बाहर— अतीन्द्रिय/इंद्रयातीत
• सीमा का अनुचित उल्लंघन— अतिक्रमण
• जो बीत गया हो— अतीत
• जिसकी गहराई का पता न लग सके— अथाह
• आगे का विचार न कर सकने वाला— अदूरदर्शी
• जो आज तक से सम्बन्ध रखता है— अद्यतन
• आदेश जो निश्चित अवधि तक लागू हो— अध्यादेश
• जिस पर किसी ने अधिकार कर लिया हो— अधिकृत
• वह सूचना जो सरकार की ओर से जारी हो— अधिसूचना
• विधायिका द्वारा स्वीकृत नियम— अधिनियम
• अविवाहित महिला— अनूढ़ा
• वह स्त्री जिसके पति ने दूसरी शादी कर ली हो— अध्यूढ़ा
• दूसरे की विवाहित स्त्री— अन्योढ़ा
• गुरु के पास रहकर पढ़ने वाला— अन्तेवासी
• पहाड़ के ऊपर की समतल जमीन— अधित्यका
• जिसके हस्ताक्षर नीचे अंकित हैँ— अधोहस्ताक्षरकर्
त्ता
• एक भाषा के विचारोँ को दूसरी भाषा मेँ व्यक्त करना— अनुवाद
• किसी सम्प्रदाय का समर्थन करने वाला— अनुयायी
• किसी प्रस्ताव का समर्थन करने की क्रिया— अनुमोदन
• जिसके माता–पिता न होँ— अनाथ
• जिसका जन्म निम्न वर्ण मेँ हुआ हो— अंत्यज
• परम्परा से चली आई कथा— अनुश्रुति
• जिसका कोई दूसरा उपाय न हो— अनन्योपाय
• वह भाई जो अन्य माता से उत्पन्न हुआ हो— अन्योदर
• पलक को बिना झपकाए— अनिमेष/निर्निमेष
• जो बुलाया न गया हो— अनाहूत
• जो ढका हुआ न हो— अनावृत
• जो दोहराया न गया हो— अनावर्त
• पहले लिखे गए पत्र का स्मरण— अनुस्मारक
• पीछे–पीछे चलने वाला/अनुसरण करने वाला— अनुगामी
• महल का वह भाग जहाँ रानियाँ निवास करती हैँ— अंतःपुर/रनिवास
• जिसे किसी बात का पता न हो— अनभिज्ञ/अज्ञ
• जिसका आदर न किया गया हो— अनादृत
• जिसका मन कहीँ अन्यत्र लगा हो— अन्यमनस्क
• जो धन को व्यर्थ ही खर्च करता हो— अपव्ययी
• आवश्यकता से अधिक धन का संचय न करना— अपरिग्रह
• जो किसी पर अभियोग लगाए— अभियोगी
• जो भोजन रोगी के लिए निषिद्ध है— अपथ्य
• जिस वस्त्र को पहना न गया हो— अप्रहत
• न जोता गया खेत— अप्रहत
• जो बिन माँगे मिल जाए— अयाचित
• जो कम बोलता हो— अल्पभाषी/मितभाषी
• आदेश की अवहेलना— अवज्ञा
• जो बिना वेतन के कार्य करता हो— अवैतनिक
• जो व्यक्ति विदेश मेँ रहता हो— अप्रवासी
• जो सहनशील न हो— असहिष्णु
• जिसका कभी अन्त न हो— अनन्त
• जिसका दमन न किया जा सके— अदम्य
• जिसका स्पर्श करना वर्जित हो— अस्पृश्य
• जिसका विश्वास न किया जा सके— अविश्वस्त
• जो कभी नष्ट न होने वाला हो— अनश्वर
• जो रचना अन्य भाषा की अनुवाद हो— अनूदित
• जिसके पास कुछ न हो अर्थात् दरिद्र— अकिँचन
• जो कभी मरता न हो— अमर
• जो सुना हुआ न हो— अश्रव्य
• जिसको भेदा न जा सके— अभेद्य
• जो साधा न जा सके— असाध्य
• जो चीज इस संसार मेँ न हो— अलौकिक
• जो बाह्य संसार के ज्ञान से अनभिज्ञ हो— अलोकज्ञ
• जिसे लाँघा न जा सके— अलंघनीय
• जिसकी तुलना न हो सके— अतुलनीय
• जिसके आदि (प्रारम्भ) का पता न हो— अनादि
• जिसकी सबसे पहले गणना की जाये— अग्रगण
• सभी जातियोँ से सम्बन्ध रखने वाला— अन्तर्जातीय
• जिसकी कोई उपमा न हो— अनुपम
• जिसका वर्णन न हो सके— अवर्णनीय
• जिसका खंडन न किया जा सके— अखंडनीय
• जिसे जाना न जा सके— अज्ञेय
• जो बहुत गहरा हो— अगाध
• जिसका चिँतन न किया जा सके— अचिँत्य
• जिसको काटा न जा सके— अकाट्य
• जिसको त्यागा न जा सके— अत्याज्य
• वास्तविक मूल्य से अधिक लिया जाने वाला मूल्य— अधिमूल्य
• अन्य से संबंध न रखने वाला/किसी एक मेँ ही आस्था रखने वाला— अनन्य
• जो बिना अन्तर के घटित हो— अनन्तर
• जिसका कोई घर (निकेत) न हो— अनिकेत
• कनिष्ठा (सबसे छोटी) और मध्यमा के बीच की उँगली— अनामिका
• मूलकथा मेँ आने वाला प्रसंग, लघु कथा— अंतःकथा
• जिसका निवारण न किया जा सके/जिसे करना आवश्यक हो— अनिवार्य
• जिसका विरोध न हुआ हो या न हो सके— अनिरुद्ध/
अविरोधी
• जिसका किसी मेँ लगाव या प्रेम हो— अनुरक्त
• जो अनुग्रह (कृपा) से युक्त हो— अनुगृहीत
• जिस पर आक्रमण न किया गया हो— अनाक्रांत
• जिसका उत्तर न दिया गया हो— अनुत्तरित
• अनुकरण करने योग्य— अनुकरणीय
• जो कभी न आया हो (भविष्य)— अनागत
• जो श्रेष्ठ गुणोँ से युक्त न हो— अनार्य
• जिसकी अपेक्षा हो— अपेक्षित
• जो मापा न जा सके— अपरिमेय
• नीचे की ओर लाना या खीँचना— अपकर्ष
• जो सामने न हो— अप्रत्यक्ष/परोक्ष
• जिसकी आशा न की गई हो— अप्रत्याशित
• जो प्रमाण से सिद्ध न हो सके— अप्रमेय
• किसी काम के बार–बार करने के अनुभव वाला— अभ्यस्त
• किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा— अभीप्सा
• जो साहित्य कला आदि मेँ रस न ले— अरसिक
• जिसको प्राप्त न किया जा सके
• जो कम जानता हो— अल्पज्ञ
• जो वध करने योग्य न हो— अवध्य
• जो विधि या कानून के विरुद्ध हो— अवैध
• जो भला–बुरा न समझता हो अथवा सोच–समझकर काम न करता हो— अविवेकी
• जिसका विभाजन न किया जा सके— अविभाज्य/अभाज्य
• जिसका विभाजन न किया गया हो— अविभक्त
• जिस पर विचार न किया गया हो— अविचारित
• जो कार्य अवश्य होने वाला हो— अवश्यंभावी
• जिसको व्यवहार मेँ न लाया गया हो— अव्यवहृत
• जो स्त्री सूर्य भी नहीँ देख पाती— असूर्यपश्या
• न हो सकने वाला कार्य आदि— अशक्य
• जो शोक करने योग्य नहीँ हो— अशोक्य
• जो कहने, सुनने, देखने मेँ लज्जापूर्ण, घिनौना हो— अश्लील
• जिस रोग का इलाज न किया जा सके— असाध्य रोग/लाइलाज
• जिससे पार न पाई जा सके— अपार
• बूढ़ा–सा दिखने वाला व्यक्ति— अधेड़
• जिसका कोई मूल्य न हो— अमूल्य
• जो मृत्यु के समीप हो— आसन्नमृत्यु
• किसी बात पर बार–बार जोर देना— आग्रह
• वह स्त्री जिसका पति परदेश से लौटा हो— आगतपतिका
• जिसकी भुजाएँ घुटनोँ तक लम्बी होँ— आजानुबाहु
• मृत्युपर्यन्त— आमरण
• जो अपने ऊपर निर्भर हो— आत्मनिर्भर/स्वावलंबी
• व्यर्थ का प्रदर्शन— आडम्बर
• पूरे जीवन तक— आजीवन
• अपनी हत्या स्वयं करना— आत्महत्या
• अपनी प्रशंसा स्वयं करने वाला— आत्मश्लाघी
• कोई ऐसी वस्तु बनाना जिसको पहले कोई न जानता हो— आविष्कार
• ईश्वर मेँ विश्वास रखने वाला— आस्तिक
• शीघ्र प्रसन्न होने वाला— आशुतोष
• विदेश से देश मेँ माल मँगाना— आयात
• सिर से पाँव तक— आपादमस्तक
• प्रारम्भ से लेकर अंत तक— आद्योपान्त
• अपनी हत्या स्वयं करने वाला— आत्मघाती
• जो अतिथि का सत्कार करता है— आतिथेय/मेजबान
• दूसरे के हित मेँ अपना जीवन त्याग देना— आत्मोत्सर्ग
• जो बहुत क्रूर व्यवहार करता हो— आततायी
• जिसका सम्बन्ध आत्मा से हो—आध्यात्मिक
• जिस पर हमला किया गया हो— आक्रांत
• जिसने हमला किया हो— आक्रांता
• जिसे सूँघा न जा सके— आघ्रेय
• जिसकी कोई आशा न की गई हो— आशातीत
• जो कभी निराश होना न जाने— आशावादी
• किसी नई चीज की खोज करने वाला— आविष्कारक
• जो गुण–दोष का विवेचन करता हो— आलोचक
• जो जन्म लेते ही गिर या मर गया हो— आजन्मपात
• वह कवि जो तत्काल कविता कर सके— आशुकवि
• पवित्र आचरण वाला— आचारपूत
• लेखक द्वारा स्वयं की लिखी गई जीवनी— आत्मकथा
• वह चीज जिसकी चाह हो— इच्छित
• किन्हीँ घटनाओँ का कालक्रम से किया गया वर्णन— इतिवृत्त
• इस लोक से संबंधित— इहलौकिक
• जो इन्द्र पर विजय प्राप्त कर चुका हो— इंद्रजीत
• माँ–बाप का अकेला लड़का— इकलौता
• जो इन्द्रियोँ से परे हो/जो इन्द्रियोँ के द्वारा ज्ञात न हो— इन्द्रियातीत
• दूसरे की उन्नति से जलना— ईर्ष्या
• उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा— ईशान/ईशान्य
• पर्वत की निचली समतल भूमि— उपत्यका
• दूसरे के खाने से बची वस्तु— उच्छिष्ट
• किसी भी नियम का पालन नहीँ करने वाला— उच्छृंखल
• वह पर्वत जहाँ से सूर्य और चन्द्रमा उदित होते माने जाते हैँ— उदयाचल
• जिसके ऊपर किसी का उपकार हो— उपकृत
• ऐसी जमीन जो अच्छी उत्पादक हो— उर्वरा
• जो छाती के बल चलता हो (साँप आदि)— उरग
• जिसने अपना ऋण पूरा चुका दिया हो— उऋण
• जिसका मन जगत से उचट गया हो— उदासीन
• जिसकी दोनोँ मेँ निष्ठा हो— उभयनिष्ठ
• ऊपर की ओर जाने वाला— उर्ध्वगामी
• नदी के निकलने का स्थान— उद्गम
• किसी वस्तु के निर्माण मेँ सहायक साधन— उपकरण
• जो उपासना के योग्य हो— उपास्य
• मरने के बाद सम्पत्ति का मालिक— उत्तराधिकारी/वारिस
• सूर्योदय की लालिमा— उषा
• जिसका ऊपर कथन किया गया हो— उपर्युक्त
• कुँए के पास का वह जल कुंड जिसमेँ पशु पानी पीते हैँ— उबारा
• छोटी–बड़ी वस्तुओँ को उठा ले जाने वाला— उठाईगिरा
• जिस भूमि मेँ कुछ भी पैदा न होता हो— ऊसर
• सूर्यास्त के समय दिखने वाली लालिमा— ऊषा
• विचारोँ का ऐसा प्रवाह जिससे कोई निष्कर्ष न निकले— ऊहापोह
• कई जगह से मिलाकर इकट्ठा किया हुआ— एकीकृत
• सांसारिक वस्तुओँ को प्राप्त करने की इच्छा— एषणा
• वह स्थिति जो अंतिक निर्णायक हो, निश्चित— एकांतिक
• जो व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर हो— ऐच्छिक
• इंद्रियोँ को भ्रमित करने वाला— ऐँद्रजालिक
• लकड़ी या पत्थर का बना पात्र जिसमेँ अन्न कूटा जाता है— ओखली
• साँप–बिच्छू के जहर या भूत–प्रेत के भय को मंत्रोँ से झाड़ने वाला— ओझा
• जो उपनिषदोँ से संबंधित हो— औपनिषदिक
• जो मात्र शिष्टाचार, व्यावहारिकता के लिए हो— औपचारिक
• विवाहिता पत्नी से उत्पन्न संतान— औरस
• हड्डियोँ का ढाँचा— कंकाल
• दो व्यक्तियोँ के बीच परस्पर होने वाली बातचीत— कथोपकथन
• बर्तन बेचने वाला— कसेरा
• जिसे अपने मत या विश्वास का अधिक आग्रह हो— कट्टर
• जिसकी कल्पना न की जा सके— कल्पनातीत
• ऐसा अन्न जो खाने योग्य न हो— कदन्न
• हाथी का बच्चा— कलभ
• कर्म मेँ तत्पर रहने वाला— कर्मठ
• एक के बाद एक— क्रम
• कान मेँ कही जाने वाली बात— कानाबाती/
कानाफूसी
• सरकार का वह अंग जो कानून का पालन करता है— कार्यपालिका
• शृंगारिक वासनाओँ के प्रति आकर्षित— कामुक
• जो दुःख या भय से पीड़ित हो— कातर
• अपनी गलती स्वीकार करने वाला— कायल
• दूसरे की हत्या करने वाला— कातिल
• बाल्यावस्था और युवावस्था के बीच की अवस्था— किशोरावस्था
• जो बात पूर्वकाल से लोगोँ मेँ सुनकर प्रचलित हो— किँवदन्ती/जनश्रुति
• अपने काम के बारे मेँ कुछ निश्चय न करने वाला— किँकर्तव्यविमूढ़
• वृक्ष लता आदि से ढका स्थान— कुञ्ज
• जिस लड़के का विवाह न हुआ हो— कुमार
• ऐसी लड़की जिसका विवाह न हुआ हो— कुमारी
• बुरे कार्य करने वाला— कुकर्मी
• बुरे मार्ग पर चलने वाला— कुमार्गी
• जिसकी बुद्धि बहुत तेज हो— कुशाग्रबुद्धि
• जो अच्छे कुल मेँ उत्पन्न हुआ हो— कुलीन
• वह व्यक्ति जिसका ज्ञान अपने ही स्थान तक सीमित हो— कूपमंडूक
• किए गए उपकार को मानने वाला— कृतज्ञ
• किए गए उपकार को न मानने वाला— कृतघ्न
• जो धन को अत्यधिक कंजूसी से खर्च करता हो— कृपण
• जिसने संकल्प कर रखा है— कृतसंकल्प
• जो केन्द्र से हटकर दूर जाता हो— केन्द्रापसारी
• जो केन्द्र की ओर उन्मुख हो— केन्द्राभिसारी/
केन्द्राभिमुख
• सर्प के शरीर से निकली हुई खोली— केँचुली
• जो क्षमा किया जा सके— क्षम्य
• जिसका कुछ ही समय मेँ नाश हो जाए— क्षणभंगुर
• जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैँ— क्षितिज
• जो भूख मिटाने के लिए बेचैन हो— क्षुधातुर
• भूख से पीड़ित— क्षुधार्त
• वह स्त्री जिसका पति अन्य स्त्री के साथ रात को रहकर प्रातः लौटे— खंडिता
• आकाशीय पिँडोँ का विवेचन करने वाला— खगोलशास्त्री
• जो व्यक्ति अपने हाथ मेँ तलवार लिए रहता है— खड्गहस्त
• नायक का प्रतिद्वन्द्वी— खलनायक
• जहाँ से गंगा नदी का उद्गम होता है— गंगोत्री
• शरीर का व्यापार करने वाली स्त्री— गणिका
• जो आकाश को छू रहा हो— गगनस्पर्शी
• पहले से चली आ रही परम्परा का अनुपालन करने वाला— गतानुगतिक
• ग्रहण करने योग्य— ग्राह्य
• गीत गाने वाला/वाली— गायक/गायिका
• गीत रचने वाला— गीतकार
• हर पदार्थ को अपनी ओर आकृष्ट करने वाली शक्ति— गुरुत्वाकर्षण
• जो बात गूढ़ (रहस्यपूर्ण) हो— गूढ़ोक्ति
• जीवन का द्वितीय आश्रम— गृहस्थाश्रम
• गायोँ के खुरोँ से उड़ी धूल— गोधूलि
• जब गायेँ जंगल से लौटती हैँ और उनके चलने की धूल आसमान मेँ उड़ती है (दिन और रात्रि के बीच का समय)— गोधूलि बेला
• गायोँ के रहने का स्थान— गौशाला
• घास खोदकर जीवन–निर्वाह करने वाला— घसियारा
• शरीर की हानि करने वाला— घातक
• जो घृणा का पात्र हो— घृणित/घृणास्पद
• जिसके सिर पर चंद्रकला हो (शिव)— चंद्रचूड़/चंद्रशेखर
• वह कृति जिसमेँ गद्य और पद्य दोनोँ होँ— चंपू
• चक्र के रूप मेँ घूमती हुई चलने वाली हवा— चक्रवात
• ब्याज का वह प्रकार जिसमेँ मूल ब्याज पर भी ब्याज लगता है— चक्रवृद्धि ब्याज
• जिसके हाथ मेँ चक्र हो— चक्रपाणि
• चार भुजाओँ वाला— चतुर्भुज
• कार्य करने की इच्छा— चिक्कीर्षा
• लंबे समय तक जीने वाला— चिरंजीवी
• जो चिरकाल से चला आया है— चिरंतन
• जो बहुत समय तक ठहर सके— चिरस्थायी
• चिँता (चिँतन) करने योग्य बात— चिँतनीय/चिँत्य
• जिस पर चिह्न लगाया गया हो— चिह्नित
• चार पैरोँ वाला— चौपाया/चतुष्पद
• जो गुप्त रूप से निवास कर रहा हो— छद्मवासी
• दूसरोँ के केवल दोषोँ को खोजने वाला— छिद्रान्वेषी
• पत्थर को गढ़ने वाला औजार— छैनी
• एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलने वाला— जंगम
• पेट की अग्नि— जठराग्नि
• बारात ठहरने का स्थान— जनवासा
• जो जल बरसाता हो— जलद
• जो जल से उत्पन्न हो— जलज
• वह पहाड़ जिसके मुख से आग निकले— ज्वालामुखी
• जल मेँ रहने वाला जीव— जलचर
• जनता द्वारा चलाया जाने वाला तंत्र— जनतंत्र
• उम्र मेँ बड़ा— ज्येष्ठ
• जो चमत्कारी क्रियाओँ का प्रदर्शन करता हो— जादूगर
• जिसने आत्मा को जीत लिया हो— जितात्मा
• जानने की इच्छा रखने वाला— जिज्ञासु
• इन्द्रियोँ को वश मेँ करने वाला— जितेन्द्रिय
• किसी के जीवन–भर के कार्योँ का विवरण— जीवन–चरित्र
• जो जीतने के योग्य हो— जेय
• जेठ (पति का बड़ा भाई) का पुत्र— जेठोत
• स्त्रियोँ द्वारा अपनी इज्जत बचाने के लिए किया गया सामूहिक अग्नि-प्रवेश— जौहर
• ज्ञान देने वाली— ज्ञानदा
• जो ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखता हो— ज्ञानपिपासु
• बहुत गहरा तथा बहुत बड़ा प्राकृतिक जलाशय— झील
• जहाँ सिक्कोँ की ढलाई होती है— टकसाल
• बर्तन बनाने वाला— ठठेरा
• जनता को सूचना देने हेतु बजाया जाने वाला वाद्य— ढिँढोरा
• जो किसी भी गुट मेँ न हो— तटस्थ/निर्गुट
• हल्की नीँद— तन्द्रा
• जो किसी कार्य या चिन्तन मेँ डूबा हो— तल्लीन
• ऋषियोँ के तप करने की भूमि— तपोभूमि
• उसी समय का— तत्कालीन
• वह राजकीय धन जो किसानोँ की सहायता हेतु दिया जाता है— तक़ाबी
• जिसमेँ बाण रखे जाते हैँ— तरकश/तूणीर
• जो चोरी–छिपे माल लाता ले जाता हो— तस्कर
• किसी को पद छोड़ने के लिए लिखा गया पत्र— त्यागपत्र
• तर्क करने वाला व्यक्ति— तार्किक
• दैहिक, दैविक और भौतिक सुख— तापत्रय
• तैर कर पार जाने की इच्छा— तितीर्षा
• ज्ञान मेँ प्रवेश का मार्गदर्शक— तीर्थँकर
• वह व्यक्ति जो छुटकारा दिलाता है/रक्षा करता है— त्राता
• दुखान्त नाटक— त्रासदी
• भूत, वर्तमान और भविष्य को जानने/देखने वाला— त्रिकालज्ञ/त्रिकालदर्शी
• गंगा, जमुना और सरस्वती नदी का संगम— त्रिवेणी
• जिसके तीन आँखे हैँ— त्रिनेत्र
• वह स्थान जो दोनोँ भृकुटिओँ के बीच होता है— त्रिकुटी
• तीन महीने मेँ एक बार— त्रैमासिक
• जो धरती पर निवास करता हो— थलचर
• पति और पत्नी का जोड़ा— दंपती
• दस वर्षोँ की समयावधि— दशक
• गोद लिया हुआ पुत्र— दत्तक
• संकुचित विचार रखने वाला— दक़ियानूस
• धन जो विवाह के समय पुत्री के पिता से प्राप्त हो— दहेज
• जंगल मेँ फैलने वाली आग— दावानल
• दिन भर का कार्यक्रम— दिनचर्या
• दिखने मात्र को अच्छा लगने वाल— दिखावटी
• जो सपना दिन (दिवा) मेँ देखा जाता है— दिवास्वप्न
• दो बार जन्म लेने वाला (ब्राह्मण, पक्षी, दाँत)— द्विज
• जिसने दीक्षा ली हो— दीक्षित
• अनुचित बात के लिए आग्रह— दुराग्रह
• बुरे भाव से की गई संधि— दुरभिसंधि
• वह कार्य जिसको करना कठिन हो— दुष्कर
• दो विभिन्न भाषाएँ जानने वाले व्यक्तियोँ को एक–दूसरे की बात समझाने वाला— दुभाषिया
• जो शीघ्रता से चलता हो— द्रुतगामी
• जिसे कठिनाई से जाना जा सके— दुर्ज्ञेय
• जिसको पकड़ने मेँ कठिनाई हो— दुरभिग्रह/दुग्राह्य
• पति के स्नेह से वंचित स्त्री— दुर्भगा
• जिसे कठिनता से साधा/सिद्ध किया जा सके— दुस्साध्य
• जो कठिनाई से समझ मेँ आता है— दुर्बोध
• वह मार्ग जो चलने मेँ कठिनाई पैदा करता है— दुर्गम
• जिसमेँ खराब आदतेँ होँ— दुर्व्यसनी
• जिसको मापना कठिन हो— दुष्परिमेय
• जिसको जीतना बहुत कठिन हो— दुर्जेय
• वह बच्चा जो अभी माँ के दूध पर निर्भर है— दुधमुँहा
• बुरे भाग्य वाला— दुर्भाग्यशाली
• जिसमेँ दया भावना हो— दयालु
• जिसका आचरण बुरा हो— दुराचारी
• दूध पर आधारित रहने वाला— दुग्धाहारी
• जिसकी प्राप्ति कठिन हो— दुर्लभ
• जिसका दमन करना कठिन हो— दुर्दमनीय
• आगे की बात सोचने वाला व्यक्ति— दूरदर्शी
• देश से द्रोह करने वाला— देशद्रोही
• देह से सम्बन्धित— दैहिक
• देव के द्वारा किया हुआ— दैविक
• प्रतिदिन होने वाला— दैनिक
• धन से सम्पन्न— धनी
• जो धनुष को धारण करता हो— धनुर्धर
• धन की इच्छा रखने वाला— धनेच्छु
• गरीबोँ के लिए दान के रूप मेँ दिया जाने वाला अन्न–धन आदि— धर्मादा
• जिसकी धर्म मेँ निष्ठा हो— धर्मनिष्ठा
• किसी के पास रखी हुई दूसरे की वस्तु— धरोहर/थाती
• मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाला— धीवर
• जो धीरज रखता हो— धीर
• धुरी को धारण करने वाला अर्थात् आधारभूत कार्योँ मेँ प्रवीण— धुरंधर
• अपने स्थान पर अटल रहने वाला— ध्रुव
• ध्यान करने योग्य अथवा लक्ष्य— ध्येय
• ध्यान करने वाला— ध्याता/ध्यानी
• जिसका जन्म अभी–अभी हुआ हो— नवजात
• गाय को दुहते समय बछड़े का गला बाँधने की रस्सी जो गाय के पैरोँ मेँ बाँधी जाती है— नवि
• जो नया–नया आया है— नवागंतुक
• जिसका उदय हाल ही मेँ हुआ है— नवोदित
• जो आकाश मेँ विचरण करता है— नभचर
• सम्मान मेँ दी जाने वाली भेँट— नजराना
• जिस स्त्री का विवाह अभी हुआ हो— नवोढ़ा
• ईश्वर मेँ विश्वास न रखने वाला— नास्तिक
• पुराना घाव जो रिसता रहता हो— नासूर
• जो नष्ट होने वाला हो— नाशवान/नश्वर
• नरक के योग्य— नारकीय
• वह स्थान या दुकान जहाँ हजामत बनाई जाती है— नापितशाला
• किसी से भी न डरने वाला— निडर/निर्भीक
• जो कपट से रहित है— निष्कपट
• जो पढ़ना–लिखना न जानता हो— निरक्षर
• जिसका कोई अर्थ न हो— निरर्थक
• जिसे कोई इच्छा न हो— निस्पृह
• रात मेँ विचरण करने वाला— निशाचर
• जिसका आकार न हो— निराकार
• केवल शाक, फल एवं फूल खाने वाला या जो मांस न खाता हो— निरामिष
• जिससे किसी प्रकार की हानि न हो— निरापद
• जिसके अवयव न हो— निरवयव
• बिना भोजन (आहार) के— निराहार
• जो यह मानता है कि संसार मेँ कुछ भी अच्छा होने की आशा नहीँ है— निराशावादी
• जो उत्तर न दे सके— निरुत्तर
• जिसके कोई दाग/कलंक न हो— निष्कलंक
• जिसमेँ कोई कंटक/अड़चन न हो— निष्कंटक
• जिसका अपना कोई शुल्क न हो— निःशुल्क
• जिसके संतान न हो— निःसंतान
• जिसका अपना कोई स्वार्थ न हो— निस्स्वार्थ
• व्यापारिक वस्तुओँ को किसी दूसरे देश मेँ भेजने का कार्य— निर्यात
• जिसको देश से निकाल दिया गया हो— निर्वासित
• बिना किसी बाधा के— निर्बाध
• जो ममत्व से रहित हो— निर्मम
• जिसकी किसी से उपमा/तुलना न दी जा सके— निरुपम
• जो निर्णय करने वाला हो— निर्णायक
• जिसे किसी चीज की लालसा न हो— निष्काम
• जिसमेँ किसी बात का विवाद न हो— निर्विवाद
• जो निन्दा करने योग्य हो— निन्दनीय
• जिसमेँ किसी प्रकार का विकार उत्पन्न न हो— निर्विकार
• जो लज्जा से रहित हो— निर्लज्ज
• जिसको भय न हो— निर्भय
• जो नीति जानता हो— नीतिज्ञ
• रंगमंच पर पर्दे के पीछे का स्थान— नेपथ्य
• आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत करने वाला— नैष्ठिक
• जो नीति के अनुकूल हो— नैतिक
• जो न्यायशास्त्र की बात जानता हो— नैयायिक
• घृत, दुग्ध, दधि, शहद व शक्कर से बनने वाला पदार्थ— पंचामृत
• पक्षपात करने वाला— पक्षपाती
• पदार्थ का सबसे छोटा कण— परमाणु
जितने की आवश्यकता हो उतना— पर्याप्त
• महीने के दो पक्षोँ मेँ से एक— पखवाड़ा
• नाटक का पर्दा गिरना— पटाक्षेप/यवनिकापतन
• अपनी गलती के लिए किया हुआ दुःख— पश्चाताप
• केवल अपने पति मेँ अनुराग रखने वाली स्त्री— पतिव्रता
• पति को चुनने की इच्छा वाली कन्या— पतिम्वरा
• उपाय/मार्ग बताने वाला— पथ-प्रदर्शक/मार्गदर्शक
• अपने मार्ग से च्युत/भटका हुआ— पथभ्रष्ट
• अपने पद से हटाया हुआ— पदच्युत
• जो भोजन रोगी के लिए उचित है— पथ्य
• घूमने–फिरने/देश–देशान्तर भ्रमण करने वाला यात्री— पर्यटक
• केवल दूध पर निर्भर रहने वाला— पयोहारी
• दूसरोँ पर निर्भर रहने वाला— पराश्रित/पराश्रयी
• परपुरुष से प्रेम करने वाली स्त्री— परकीया
• पति द्वारा छोड़ दी गई पत्नी— परित्यका
• दूसरे का मुँह ताकने वाला— परमुखापेक्षी
• जो पहनने लायक हो— परिधेय
• जो मापा जा सके— परिमेय
• जो सदा बदलता रहे— परिवर्तनशील
• जो आँखोँ के सामने न हो— परोक्ष/अप्रत्यक्ष
• दूसरे पर उपकार करने वाला— परोपकारी/परमार्थी
• जो पूरी तरह से पक चुका हो/पारंगत हो चुका हो— परिपक्व
• पर्दे के अंदर रहने वाली— पर्दानशीन
• प्रशंसा करने योग्य— प्रशंसनीय
• किसी प्रश्न का तत्काल उत्तर दे सकने वाली मति— प्रत्युत्पन्नमति
• किसी वाद का विरोध करने वाला— प्रतिवादी
• शरणागत की रक्षा करने वाला— प्रणतपाल
• वह ध्वनि जो कहीँ से टकराकर आए— प्रतिध्वनि
• जो किसी मत को सर्वप्रथम चलाता है— प्रवर्तक
• वह स्त्री जिसके हाल ही मेँ शिशु उत्पन्न हुआ हो— प्रसूता
• वह आकृति जो किसी शीशे, जल आदि मेँ दिखाई दे— प्रतिबिम्ब
• हास्य रस से परिपूर्ण नाटिका— प्रहसन
• प्रमाण द्वारा सिद्ध करने योग्य— प्रमेय
• संध्या के बाद व रात्रि होने के पूर्व का समय— प्रदोष/पूर्वरात्र
• ज्ञान नेत्र से देखने वाला अंधा व्यक्ति— प्रज्ञाचक्षु
• सभा मेँ विचारार्थ प्रस्तुत बात— प्रस्ताव
• हाथ से लिखी गई पुस्तक— पाण्डुलिपि
• किसी परिश्रम के बदले मिलने वाली राशि— पारिश्रमिक
• जिसका स्वभाव पशुओँ के समान हो— पाशविक
• महीने के प्रत्येक पक्ष से संबंधित— पाक्षिक
• किसी विषय का पूर्ण ज्ञाता— पारंगत
• जिसमेँ से आर–पार देखा जा सकता हो— पारदर्शी
• जो परलोक से संबंधित हो— पारलौकिक
• मार्ग मेँ खाने के लिए भोजन— पाथेय
• जिसका संबंध पृथ्वी से हो— पार्थिव
• ज्ञात इतिहास के पूर्व समय का— प्रागैतिहासिक
• स्थल का वह भाग जिसके तीन ओर पानी हो— प्रायद्वीप
• जिसको देखकर अच्छा लगे— प्रियदर्शी
• पीने की इच्छा रखने वाला— पिपासु
• बार–बार कही गई बात— पुनरुक्ति
• जिसका पुनः जन्म हुआ हो— पुनर्जन्म
• पहले किया गया कथन— पूर्वोक्त
• दोपहर से पहले का समय— पूर्वाह्न
• प्राचीन इतिहास का ज्ञाता— पुरातत्त्ववेत्ता
• पीने योग्य पदार्थ— पेय
• पिता एवं प्रपिताओँ से संबंधित— पैतृक
• जो सम्पत्ति पिता से प्राप्त हो— पैतृक सम्पत्ति
• फटे–पुराने कपड़े पहनने वाला— फटीचर
• केवल फलोँ पर निर्वाह करने वाला— फलाहारी
• फल की इच्छा रखने वाला— फलेच्छु
• बुरी किस्मत वाला— बदकिस्मत
• बुरे मिजाज (आचरण) वाला— बदमिजाज
• सूर्योदय से पहले दो घड़ी तक का समय— ब्रह्ममुहूर्त
• जीवन का प्रथम आश्रम— ब्रह्मचर्याश्रम
• बहुत विषयोँ का जानकार— बहुज्ञ
• जिसने सुनकर अनेक विषयोँ का ज्ञान प्राप्त किया हो— बहुश्रुत
• समुद्र मेँ लगने वाली आग— बड़वानल
• जो अनेक रूप धारण करता हो— बहुरूपिया
• बहुत से देवताओँ के अस्तित्व मेँ विश्वास करने वाला मत— बहुदेववाद
• काफी अधिक कीमत का— बहुमूल्य
• अनेक भाषाओँ को जानने वाला— बहुभाषाविद्
• रात का भोजन— ब्यालू/रात्रिभोज
• जिस स्त्री के कोई संतान नहीँ हुई हो— बाँझ
• खाने का इच्छुक— बुबुक्षु

• किसी भवनादि के खंडित होने के बाद बचे भाग— भग्नावशेष
• भय के कारण बेचैन— भयाकुल
• भाग्य पर भरोसा रखने वाला— भाग्यवादी
• जो भाग्य का धनी हो— भाग्यवान
• दीवारोँ पर बने हुए चित्र— भित्तिचित्र
• जो पृथ्वी के भीतर का ज्ञान रखता हो— भूगर्भवेता
• धरती पर चलने वाला जन्तु— भूचर
• जो पहले था या हुआ— भूतपूर्व
• धरती को धारण करने वाला पर्वत— भूधर
• औषधियोँ का जानकार— भेषज
• प्रातःकाल गाया जाने वाला राग— भैरवी
• सूर्योदय के पहले का समय— भोर
• भूगोल से संबंधित— भौगोलिक
• फूलोँ का रस— मकरंद
• दोपहर का समय— मध्याह्न
• सर्दी मेँ होने वाली वर्षा— महावट/मावठ
• हाथी को हाँकने वाला— महावत
• सुख एवं दुःख मेँ एक समान रहने वाला— मनस्वी
• जिसकी आँखेँ मगर जैसी हो— मकराक्ष
• किसी मत का अनुसरण करने वाला— मतानुयायी
• दो पक्षोँ के बीच मेँ पड़कर फैसला कराने वाला— मखत्राता/यज्ञरक्

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